नूतन ठाकुर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: धोखाधड़ी केस में मिली अग्रिम जमानत, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर पहले ही हो चुके हैं रिहा
देवरिया के 1999 भूमि आवंटन मामले में चल रही थी जांच, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक
लखनऊ/देवरिया: उत्तर प्रदेश के चर्चित भूमि आवंटन मामले में नूतन ठाकुर को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।
नूतन ठाकुर इस मामले में सह-अभियुक्त हैं, जबकि उनके पति और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। हालांकि, उन्हें फरवरी 2026 में जमानत मिल गई थी।
क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 1999 का है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उसी दौरान औद्योगिक क्षेत्र में नूतन ठाकुर के नाम पर एक प्लॉट आवंटित कराया गया, जिसमें पहचान छिपाने और दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप लगा।
जांच में यह भी सामने आया कि दस्तावेजों में ‘नूतन ठाकुर’ की जगह ‘नूतन देवी’ और पति के नाम में ‘अमिताभ’ की जगह ‘अभिजात’ लिखा गया था।
केस और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
इस मामले में सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे बाद में देवरिया स्थानांतरित कर दिया गया।
इसके बाद 10 दिसंबर 2025 को पुलिस ने अमिताभ ठाकुर को चलती ट्रेन से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें जिला जज की अदालत से जमानत मिल गई।
हाईकोर्ट से मिली राहत
पति की गिरफ्तारी के बाद नूतन ठाकुर पर भी गिरफ्तारी की आशंका थी। उन्होंने पहले जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी, जो खारिज हो गई थी।
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।
कोर्ट ने माना कि मामला पुराना है और जांच में सहयोग जरूरी है, लेकिन गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।
राजनीति से जुड़ा मामला
अमिताभ और नूतन ठाकुर लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी को उनके समर्थकों ने राजनीतिक प्रतिशोध बताया था।
फिलहाल, नूतन ठाकुर को मिली इस राहत के बाद उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है।