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बरेली: नाबालिग से रेप के मामले में पंचायत ने कराया समझौता, बालिग होने पर शादी कराने का फरमान

शीशगढ़ थाना क्षेत्र का मामला: साल भर से डरा-धमकाकर दुष्कर्म का आरोप; पुलिस ने बताया प्रेम-प्रसंग, वकीलों ने कहा— पंचायत का फैसला अवैध।

 

भदैनी मिरर डेस्क: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक चौंकाने वाला और विवादित मामला सामने आया है। यहां एक नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के गंभीर आरोप के बाद गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने दोनों पक्षों पर कथित रूप से दबाव बनाकर मामले में समझौता करा दिया। इतना ही नहीं, पंचायत ने फैसला सुनाया कि अभी किशोरी का रोका और टीका कराया जाएगा तथा उसके बालिग होते ही आरोपी युवक से उसकी शादी करा दी जाएगी।

यह अजीबोगरीब फरमान सामने आने के बाद पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।

साल भर से डरा-धमकाकर रेप का आरोप

मामला बरेली के शीशगढ़ थाना क्षेत्र का है। पीड़िता की मां ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया था कि गांव के ही एक युवक ने लगभग एक साल पहले उनकी 16 वर्षीय बेटी को डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और आपत्तिजनक फोटो बना लिए। इसके बाद आरोपी फोटो वायरल करने की धमकी देकर लगातार एक साल तक किशोरी का शारीरिक शोषण करता रहा।

किशोरी के डरे-सहमे रहने पर जब परिजनों ने पूछताछ की, तो उसने पूरी आपबीती बताई। परिजनों का आरोप है कि जब वे आरोपी के घर शिकायत करने पहुंचे, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई, जिसके बाद उन्होंने शीशगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई।

थाने में शिकायत के बाद बैठी पंचायत, हुआ रोका-टीका

पुलिस में शिकायत की खबर मिलते ही गांव के दबंगों और संभ्रांत लोगों ने पंचायत बुला ली। आरोप है कि पंचायत में दोनों पक्षों पर भारी दबाव बनाकर समझौते के लिए राजी किया गया। सोमवार को आरोपी युवक और किशोरी के परिवार की मौजूदगी में बाकायदा गोद भराई और टीके की रस्म अदा की गई। पंचायत ने तय किया कि जैसे ही किशोरी 18 वर्ष की (बालिग) होगी, उसका विवाह आरोपी के साथ कर दिया जाएगा।

'रेप में समझौता गैरकानूनी, पंचायत करने वाले भी बनेंगे आरोपी'

इस पूरे घटनाक्रम पर कानूनी जानकारों और अधिवक्ताओं ने सख्त आपत्ति जताई है।

  • कानूनी पहलू: वरिष्ठ अधिवक्ता उमंग रावत का कहना है कि दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों में कानूनन कोई समझौता (Compromise) मान्य नहीं है। पोक्सो (POCSO) और रेप से जुड़े मामलों में पंचायत द्वारा कराया गया समझौता पूरी तरह से गैरकानूनी और अवैध है।

  • कार्रवाई का दायरा: उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में गैरकानूनी समझौता कराने वाले पंच और ग्रामीण भी अपराध को छिपाने के षड्यंत्र में पुलिस जांच के बाद सह-आरोपी बनाए जा सकते हैं।

पुलिस का पक्ष: 'मामला प्रेम-प्रसंग का, तहरीर मिलने पर होगी FIR'

दूसरी ओर, शीशगढ़ थाना प्रभारी (Inspector) वीरेंद्र पाल का कहना है कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा प्रतीत होता है और ग्रामीणों ने आपसी स्तर पर बातचीत की है। पुलिस का दावा है कि थाने में अभी तक कोई लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। यदि पीड़िता या उसका परिवार लिखित शिकायत देता है, तो तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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