Ballia Bribe News: क्या जाति प्रमाण पत्र की घूस 50 हजार रुपये हो गई? शिकायत सुनते ही भड़के डीएम
यूपी के बलिया में जाति प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर 50 हजार रुपये मांगने का ऑडियो वायरल; शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर लेखपाल निलंबित।
भदैनी मिरर स्टेट डेस्क: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक क्षेत्रीय लेखपाल पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने के बदले प्रति आवेदन 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। मामला सामने आने और साक्ष्य मिलने के बाद बलिया के जिलाधिकारी (DM) ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित लेखपाल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
इसके साथ ही आरोपी लेखपाल के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
50 हजार रुपये घूस मांगने का ऑडियो रिकॉर्डिंग पेश
मामला बलिया सदर तहसील के राजस्व ग्राम सुल्तानपुर का है। सुल्तानपुर निवासी सुरेंद्र प्रसाद तुरैहा ने जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि 'तुरैहा' जाति का प्रमाण पत्र जारी कराने के एवज में क्षेत्रीय लेखपाल और अन्य कर्मचारियों द्वारा प्रति आवेदन 50 हजार रुपये की मांग की जा रही है।
अपनी शिकायत को साबित करने के लिए आवेदक ने मोबाइल पर हुई बातचीत की दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य (Proof) के रूप में अधिकारियों को उपलब्ध कराईं।
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ऑडियो में अधिकारियों के नाम पर घूसखोरी का दावा: शिकायतकर्ता का दावा है कि वायरल रिकॉर्डिंग में सुनाई दे रही आवाज क्षेत्रीय लेखपाल संदीप सिंह की है। रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर यह कहते सुना जा सकता है कि पैसे देने के बाद अगले दिन बांसडीह कचहरी से काम हो जाएगा और इस रकम का एक बड़ा हिस्सा उच्च अधिकारियों तक भी जाता है।
तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार सदर ने प्राथमिक जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आवेदक का ऑनलाइन फॉर्म आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण पोर्टल पर निरस्त किया गया था। हालांकि, ऑडियो रिकॉर्डिंग के प्राथमिक परीक्षण के आधार पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए निलंबन की संस्तुति की गई।
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भूलेख कार्यालय से संबद्ध: जिलाधिकारी के आदेश के बाद लेखपाल संदीप सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें तहसील बलिया के भूलेख कार्यालय से संबद्ध (Attach) किया गया है।
प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से तहसील परिसर और राजस्व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी दोषी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।