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अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में SIT ने कहा— 2 दिन के भीतर दाखिल होगी चार्जशीट

CJI सूर्यकांत की पीठ में SIT की स्टेटस रिपोर्ट पेश; 90 दिनों की समय सीमा खत्म होने से पहले चार्जशीट पेश करेगी यूपी पुलिस।

 

भदैनी मिरर डेस्क: अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी और चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अगले दो दिनों के भीतर अदालत में अपनी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर देगी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

डिफॉल्ट जमानत से बचाने के लिए उठाया कदम

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान पीठ को स्पष्ट किया कि मामले में पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिन की वैधानिक अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है। यदि इस अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, तो कानून के तहत आरोपियों को 'डिफॉल्ट जमानत' (Default Bail) का अधिकार मिल सकता है।

इसे ध्यान में रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को भरोसा दिलाया, "हम दो दिनों के भीतर ही संबंधित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर देंगे।"

SIT ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने अब तक की जांच से जुड़ी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जजों के समक्ष प्रस्तुत की। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस स्टेटस रिपोर्ट का गहनता से अवलोकन किया।

राम मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट की भी मांग

उल्लेखनीय है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंदे में कथित हेराफेरी की स्वतंत्र जांच और वित्तीय लेन-देन का व्यापक ऑडिट कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

  • याचिकाकर्ताओं में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह, अधिवक्ता एनके गोस्वामी, अजय कुमार राय और हिंदू धर्म परिषद शामिल हैं।

  • इससे पहले जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, यूपी सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

  • अगस्त में कोर्ट ने जनहित में इस मुद्दे को उठाने वाले नागरिकों को अपने सुझाव सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय में जमा कराने की छूट भी दी थी।

अब यूपी सरकार और SIT द्वारा दो दिनों में दाखिल की जाने वाली चार्जशीट के बाद इस पूरे मामले की कानूनी दिशा तय होगी।

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