सपा नेता अमर सिंह की पार्टी लोकमंच के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं इस्तीफा देनेवाले अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह
बड़े भाई ने खोला पोल-दावा किया कि प्रशांत सिंह और बहन जया ने एक ही डाक्टर से बनवाया दिव्यांगता प्रमाण पत्र
शंकराचार्य के बयान से क्षुब्ध होकर और योगी, मोदी और शाह के प्रति पूरी भक्ति दिखाते हुए दिया था इस्तीफा
लखनऊ। सीएम योगी, पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह के प्रति पूरी भक्ति प्रदर्शित करते हुए इस्तीफा देनेवाले अयोध्या में राज्य कर के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह के दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच चल रही है। इसमें वह मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित नहीं हो रहे हैं। आपको बता दें कि मऊ के सरवां गांव निवासी प्रशांत सिंह पहले अमर सिंह की लोकमंच पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। 2012 में पीसीएस पास करने वाले प्रशांत के 2009 के नेत्र संबंधी दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच 2021 से लंबित है।
अयोध्या में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की पूरी पोल अब खुल चुकी है।
उनकी पोल खोलनेवाले कोई और नही बल्कि प्रशांत सिंह के सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह है। प्रशांत सिंह के इस्तीफे के बाद उनकी सच्चाई दुनिया के सामने लाने वाले डॉ. विश्वजीत सिंह को लगातार धमकियां मिल रही हैं। डॉ. विश्वजीत कहते हैं कि वह डरने वाले नहीं है। जिसे जो करना है कर लें। मैं किसी विकलांग का हक नहीं जाने दूंगा। यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है। उनकी शिकायत के बाद से प्रशांत कुमार सिंह और उनकी छोटी बहन जया सिंह से बातचीत बंद हो चुकी है। जया सिंह वर्तमान में कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं। वह भी इस मामले में जांच के दायरे में हैं। विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत कुमार सिंह और उनकी बहन जया सिंह ने अलग-अलग वर्षों में एक ही डॉक्टर से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया। प्रशांत कुमार सिंह ने वर्ष 2009 में और जया सिंह ने वर्ष 2012 में दिव्यांगता प्रमाण पत्र हासिल किया। आरोप है कि दोनों प्रमाण पत्र फर्जी हैं और इनके जरिए सरकारी सेवा में लाभ लिया गया। इस संबंध में उनके पास दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं। यह दस्तावेज एजेंसियों को सौंपे जा चुके हैं। इसी मामले में प्रशांत सिंह और बहन जया सिंह की जांच चल रही है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों यूजीसी संशोधन बिल और प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान की घटना से क्षुब्ध होकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया था। इसके दूसरे दिन आयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने इस्तीफा दिया। इस्तीफा पत्र में उन्होंने योगी, मोदी, शाह को अपना अन्नदाता और सेवक बताया। पूरी भक्ति दिखाते हुए अलंकार अग्निहोत्री से एक कदम आगे जाकर वह रोये भी। कहाकि वह सीएम योगी और पीएम मोदी के खिलाफ शंकराचार्य के बयान से आहत हो गये। अपनी जिम्मेदारियां भी बताई, भक्ति और करूणा के सागर में गोते लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। अब प्रशांत सिंह के बारे में कुछ नयी जानकारियां मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अयोध्या के राज्य कर के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह सपा नेता रहे स्व. अमर सिंह की पार्टी लोकमंच के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उनके दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच चल रही है। किन्हीं कारणों से वह मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित नहीं हो रहे है। मऊ के सरवां गांव निवासी प्रशांत ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई आंबेडकर नगर के टांडा से की है। उस समय उनके पिता त्रिपुरारी सिंह एनटीपीसी टांडा में कार्यरत थे। बाद में वह मऊ में बिजली विभाग के क्लर्क के पद से रिटायर हुए। प्रशांत सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद वह मऊ आकर कोचिंग चलाने लगे। इसी दौर में उनका रुझान राजनीति की ओर बढ़ा और वह कुछ समय तक पीस पार्टी के कार्यकर्ता रहे। बाद में अमर सिंह की पार्टी लोकमंच के जिलाध्यक्ष बने। 2012 में उप्र प्रांतीय सिविल सेवा परीक्षा (पीसीएस) पास करके सेल टैक्स विभाग में अधिकारी बने।
उनकी पहली पोस्टिंग 2013 में सहारनपुर में हुई थी। अभी वह अयोध्या में राज्य कर के डिप्टी कमिश्नर के पद पर हैं। गांव के पैतृक घर में उनके पिता त्रिपुरारी सिंह अकेले रहते हैं। प्रशांत सिंह की दो बेटियां हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संजय गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2021 में सरवा गांव निवासी विश्वजीत सिंह ने सहायक आयुक्त जीएसटी के विरुद्ध प्रार्थना पत्र देकर दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच की मांग की थी। इस मामले की जांच के लिए मंडलीय स्तर पर मेडिकल बोर्ड बनाया बनाया गया है। उन्हें दो बार पत्र भी भेजा गया था, लेकिन उपस्थित नहीं हुए। इनका प्रणाम पत्र वर्ष 2009 में बना है। इसका सत्यापन किया जा चुका है। इनको आंख संबंधित समस्या पर प्रमाण पत्र जारी हुआ है।