Allahabad High Court: बाराबंकी DIOS पर गिरी गाज, हाईकोर्ट ने तत्काल हटाने का दिया आदेश; अब UP STF करेगी पूरे खेल की जांच
शिक्षक की अवैध ज्वाइनिंग और वेतन भुगतान मामले में लखनऊ बेंच सख्त, अयोध्या मंडल के तत्कालीन जेडी (JD) पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश।
लखनऊ/ भदैनी मिरर: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। बाराबंकी के सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज में एक शिक्षक की नियम विरुद्ध 'पुनः ज्वाइनिंग' के मामले में न्यायालय ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने इस पूरे मामले की जांच यूपी एसटीएफ (UP STF) को सौंपते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला सहायक शिक्षक अभय कुमार की नियुक्ति से जुड़ा है। अभय कुमार की नियुक्ति 2018 में हुई थी, लेकिन जून 2024 में उन्होंने कॉलेज प्रबंध समिति की अनुमति के बिना छत्तीसगढ़ के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवक्ता पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। बाद में उन्होंने मूल पद पर अधिकार बनाए रखने का अनुरोध किया, जिसे प्रबंध समिति ने खारिज कर दिया।
विवाद तब शुरू हुआ जब प्रबंध समिति की अनुमति के बिना ही सितंबर 2025 में अधिकारियों के मिलीभगत से उन्हें दोबारा कॉलेज में ज्वाइन करा दिया गया और अक्टूबर का वेतन भी जारी कर दिया गया।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: "रिकॉर्ड में हेरफेर और भ्रामक जानकारी"
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि डीआईओएस बाराबंकी ने रिकॉर्ड में हेरफेर किया और न्यायालय को भ्रामक जानकारी देने का प्रयास किया। कोर्ट ने कहा:
"किसी भी शिक्षक की ऐसी पुनः नियुक्ति का कोई विधिक आधार नहीं है। यह पूरी तरह से अवैध है। निष्पक्ष जांच के लिए डीआईओएस का तत्काल तबादला आवश्यक है।"
न्यायालय ने शिक्षक को अब तक दिए गए अवैध वेतन की वसूली करने का भी आदेश दिया है।
JD और प्रधानाचार्य की भूमिका भी संदेह के घेरे में
हाईकोर्ट ने इस भ्रष्टाचार में केवल डीआईओएस ही नहीं, बल्कि अयोध्या मंडल के तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) और कॉलेज के प्रधानाचार्य की भूमिका पर भी गहरा संदेह जताया है। जेडी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। एसटीएफ को निर्देश दिया गया है कि वह इस 'सांठगांठ' की गहराई से जांच कर डीजी एसटीएफ को रिपोर्ट सौंपे।
मुख्य सचिव को निर्देश: अब व्हाट्सएप और ई-मेल से भेजें आदेश
अदालत ने शिक्षा विभाग में आदेशों के संप्रेषण (Communication) में जानबूझकर की जा रही देरी और लापरवाही पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि भविष्य में कोर्ट या विभाग के सभी आदेश ई-मेल और व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजे जाएं, ताकि अधिकारी "आदेश नहीं मिला" जैसे बहाने बनाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा न दे सकें।
अगली सुनवाई और अनुपालन रिपोर्ट
न्यायालय ने इस मामले में की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 को निर्धारित की गई है। इस फैसले के बाद से बाराबंकी समेत पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।