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Vinesh Phogat Case: विनेश फोगाट को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, एशियन गेम्स चयन ट्रायल में शामिल होने की मिली मंजूरी

'मातृत्व उत्सव है, नुकसान की वजह नहीं'— WFI के बैन को ठेंगा दिखा कोर्ट ने दिया विनेश का साथ; फिटनेस मूल्यांकन के बाद 30-31 मई को ट्रायल।

 

नई दिल्ली। भारतीय महिला कुश्ती की स्टार पहलवान विनेश फोगाट को लेकर चल रहे हाई-प्रोफाइल विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विनेश फोगाट को आगामी एशियाई खेलों (Asian Games) के चयन ट्रायल में भाग लेने की सशर्त अनुमति दे दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट किया कि खेल संगठनों को बदले की भावना से ऊपर उठकर खिलाड़ियों के हित में काम करना चाहिए।

डिवीजन बेंच का बड़ा आदेश, बनेगी विशेषज्ञों की समिति

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को एक विशेष निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार तत्काल विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करे, जो विनेश फोगाट की शारीरिक फिटनेस का मूल्यांकन करेगी। इसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर विनेश को 30-31 मई को आयोजित होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में मैट पर उतरने का मौका मिलेगा।

'मातृत्व उत्सव है, इसे करियर के खिलाफ इस्तेमाल न करें'

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने मातृत्व (Motherhood) को लेकर बेहद भावुक और कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "हमारे देश में मातृत्व का सर्वोच्च सम्मान किया जाता है। इसे किसी भी महिला खिलाड़ी के करियर में बाधा या नुकसान की वजह नहीं बनाया जा सकता। मातृत्व एक उत्सव है, कोई गुनाह नहीं।" गौरतलब है कि विनेश फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं और इसके बाद से वे लगातार घरेलू कुश्ती में वापसी के लिए पसीना बहा रही हैं।

WFI ने जून 2026 तक लगाया था बैन

इससे पहले भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने नियमों का हवाला देते हुए विनेश फोगाट को 26 जून 2026 तक सभी घरेलू टूर्नामेंट्स और ट्रायल्स से अयोग्य (Ban) घोषित कर दिया था। महासंघ का तर्क था कि संन्यास की घोषणा के बाद जो भी खिलाड़ी वापसी करता है, उसे यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत कम से कम 6 महीने पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य होता है, जिसे विनेश ने पूरा नहीं किया।

'राष्ट्रीय शर्म' वाली टिप्पणी पर कोर्ट ने महासंघ को फटकारा

WFI द्वारा विनेश को जारी किए गए 15 पन्नों के कारण बताओ नोटिस पर भी अदालत ने तीखे सवाल दागे। विनेश के वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि 9 मई को जारी इस नोटिस में पेरिस ओलंपिक के डिस्क्वालिफिकेशन को 'राष्ट्रीय शर्म' कहा गया था, जो पूरी तरह से अपमानजनक और पूर्वाग्रह से ग्रसित है।

इस पर खंडपीठ ने महासंघ को आईना दिखाते हुए कहा, "यदि किसी अधिकारी या संगठन को कोई व्यक्तिगत नाराजगी है, तो उसकी सजा खेल को क्यों दी जाए? विनेश एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की एथलीट हैं। मां बनने के महज 10 महीने बाद उन्हें इस तरह ट्रायल से बाहर रखने का क्या औचित्य है?"

सिंगल जज के फैसले को विनेश ने दी थी चुनौती

आपको बता दें कि इससे पहले 18 मई को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विनेश फोगाट को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। हार न मानते हुए विनेश ने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच (खंडपीठ) में अपील दायर की, जहां आखिरकार उन्हें न्याय मिला। इस फैसले के बाद खेल प्रेमियों और विनेश के प्रशंसकों में खुशी की लहर है, और अब सबकी नजरें 30-31 मई को होने वाले चयन ट्रायल पर टिकी हैं।