वाराणसी: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन दुर्गा घाट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, माँ ब्रह्मचारिणी के दर्शन से दूर होती हैं सभी बाधाएं
काशी के अतिप्राचीन माँ ब्रह्मचारिणी मंदिर में मंगला आरती और षोडशोपचार पूजन के बाद खुले कपाट, भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि और आरोग्य की मन्नत
भदैनी मिरर न्यूज डेस्क, वाराणसी।शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के द्वितीय दिन सोमवार को धर्मनगरी काशी के मंदिरों में भोर से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। काशी में नौ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन की प्राचीन परंपरा के तहत आज दूसरे दिन उत्तर दिशा में गंगा तट पर स्थित प्रसिद्ध दुर्गा घाट के अतिप्राचीन माँ ब्रह्मचारिणी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। जयकारों और शंखनाद से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा।
प्रातः मंगला आरती, षोडशोपचार पूजन और महाश्रृंगार
मंदिर के महंत पंडित राजेश सागर ने बताया कि नवरात्रि का दूसरा दिन एक प्रकार से भगवती का प्राकट्य महोत्सव होता है, जो आश्विन (शारदीय) और चैत्र दोनों ही नवरात्रों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि सोमवार प्रातः काल सबसे पहले भगवती की भव्य मंगला आरती संपन्न हुई। इसके बाद वैदिक विधि-विधान से देवी का षोडशोपचार पूजन किया गया, जिसमें 'श्री सूक्त' के सिद्ध मंत्रों के साथ माँ भगवती का भव्य अभिषेक हुआ। महाश्रृंगार और आरती के पश्चात सभी दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए।
संतान प्राप्ति और सर्वबाधा मुक्ति का माहात्म्य
पुराणों के अनुसार, 'ब्रह्म' का अर्थ तपस्या है और तप का आचरण करने के कारण ही भगवती को 'ब्रह्मचारिणी' कहा जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी का दर्शन-पूजन करने से निसंतान दंपत्तियों को मनोवांछित संतान की प्राप्ति होती है।
माँ अपने भक्तों को धन-धान्य, यश और कीर्ति से परिपूर्ण करती हैं। सर्व बाधा, रोग बाधा, ऋण बाधा, शत्रु बाधा और व्यापारिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
देश में सुख-शांति की कामना
काशी के साथ-साथ आसपास के विभिन्न जिलों से आए दर्शनार्थियों ने व्रत रखकर माँ के दरबार में हाजिरी लगाई। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार के आरोग्य और समृद्धि के साथ-साथ देश में सुख, शांति और सौहार्द बने रहने की प्रार्थना की।