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विश्वप्रसिद्ध रामनगर रामलीला का चतुर्थ दिन: पुष्प वाटिका में हुआ 'फुलवारी लीला' और 'अष्ट सखी संवाद' का अलौकिक मंचन

रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर भ्रमण; अष्ट सखियों के भक्ति-श्रृंगार रस और गौरी पूजन के साथ संपन्न हुआ चतुर्थ दिवस का प्रसंग।

 

भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क: काशी की विश्वविख्यात रामनगर रामलीला के चौथे दिन 'अष्ट सखी संवाद' और 'फुलवारी (पुष्प वाटिका) लीला' का अत्यंत मनमोहक एवं अलौकिक मंचन किया गया। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के २१७वें दोहे से २३८वें दोहे के आगे की चौपाइयों का पाठ कर लीला को सजीव रूप प्रदान किया गया।

जनकपुर भ्रमण: "स्याम गौर किमि कहौं बखानी..."

चतुर्थ दिन की लीला की शुरुआत भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी द्वारा महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा लेकर जनकपुर नगर भ्रमण से हुई। दो अति सुंदर बालकों को देखकर जनकपुर के नर-नारी और बालक मुग्ध हो गए। झरोखों से दोनों भाइयों की अलौकिक छवि को निहारती हुई जनकपुर की युवतियों और सखियों में संवाद शुरू हुआ।

तुलसीदास जी की अमर पंक्तियों—

देखन बागु कुअँर दुइ आए। बय किसोर सब भाँति सुहाए॥

स्याम गौर किमि कहौं बखानी। गिरा अनयन नयन बिनु बानी॥

के माध्यम से एक सखी दूसरी सखी से कहती है कि दो अत्यंत मनमोहक किशोर राजकुमार बाग देखने आए हैं, जिनके सौंदर्य का वर्णन शब्द और आंखें मिलकर भी नहीं कर सकतीं। सखियों के बीच राम-लक्ष्मण के रूप, शिव धनुष को तोड़ने और माता सीता के साथ उनके संभावित विवाह को लेकर भावपूर्ण संवाद हुआ। किसी सखी ने दोनों राजकुमारों को देखकर कहा— "सिया सोने की अंगूठी, राम सांवरो नगीना हैं।"

सजीव पुष्प वाटिका में योगशक्ति और योगपुरुष का मिलन

गुरु पूजन के लिए पुष्प एकत्र करने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण जी जनकपुर की पुष्प वाटिका पहुंचे। रामनगर की इस ऐतिहासिक लीला में पुष्प वाटिका का दृश्य ऐसा सजीव जान पड़ा मानो श्रद्धालु त्रेतायुग के प्रत्यक्ष साक्षी बन गए हों। इसी पावन वाटिका में माता सीता और प्रभु श्रीराम का प्रथम दर्शन हुआ, जिसे मानस में योगशक्ति और योगपुरुष का अद्वितीय मिलन माना गया है।

माता जानकी का गौरी पूजन और आकाशवाणी

पुष्प वाटिका में दर्शन-पूजन के बाद माता जानकी अपनी सखियों के साथ देवी गौरी (पार्वती जी) के पूजन हेतु मंदिर पहुंचीं। वहां उन्होंने पूर्ण श्रद्धा के साथ देवी गौरी से श्रीराम को वर रूप में प्राप्त करने की मनोकामना की। इसके पश्चात आकाशवाणी हुई कि उन्हें मनोवांछित वर की प्राप्ति होगी।

गौरी पूजन के उपरांत माता सीता राजमहल लौट गईं और प्रभु श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण के साथ गुरु विश्वामित्र के आश्रम वापस आ गए। इसके साथ ही चतुर्थ दिवस की लीला का विश्राम हुआ। लीला के अंत में संत-महात्माओं द्वारा प्रभु श्रीराम की भव्य आरती उतारी गई, जिससे पूरा रामनगर परिसर "जय-जय श्री सीताराम" और "हर-हर महादेव" के उद्घोष से गूंज उठा।