{"vars":{"id": "125128:4947"}}

रामनगर रामलीला: "तेहि छन मध्य राम धनु तोड़ा...", 7:30 बजे टूटा शिवधनुष; दगी तोप और माता सीता ने पहनाई जयमाल

जनकपुर में उमड़ा श्रद्धा का समंदर; सफेद महताबी की रोशनी में प्रभु श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हुई काशी की विश्वप्रसिद्ध रामलीला

 

वाराणसी / भदैनी मिरर: "तेहि छन मध्य राम धनु तोड़ा..."

रामायणी दल के मुख से जैसे ही रामचरितमानस की यह पावन चौपाई गूँजी, ठीक शाम 7:30 बजे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने एक सहज झटके में पिनाक (शिवधनुष) को तीन खंडों में विभाजित कर दिया। धनुष टूटते ही पूर्वी बुर्ज पर तैनात मशालची के संकेत पर तोपची ने गर्जना के साथ तोप दागी और पूरा जनकपुर प्रांगण श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में 'धनुष यज्ञ' और 'जयमाल' के अलौकिक तथा अप्रतिम प्रसंग को देखने के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा जनकपुर खचाखच भर गया।

मशालची और तोपची रहे मुस्तैद, 7:05 बजे रंगभूमि पहुंचे श्रीराम

शाम साढ़े छह बजते ही लीला प्रेमी हर हाल में इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए जनकपुर की ओर कदम बढ़ा चुके थे। सात बजते-बजते चारों दिशाओं में सिर्फ अपार जनसमुदाय नजर आ रहा था। परंपरा के अनुसार, पूर्वी बुर्ज पर मशालची अपनी मशाल थामे मुस्तैद खड़ा था, तो दूसरी तरफ पीएसी परिसर में तोपची तोप के साथ तैयार था।

घड़ी में ठीक 7:05 बजते ही श्रीराम ने धनुष भंग के संकल्प के साथ रंगभूमि प्रांगण में प्रवेश किया। रामायणियों के मानस पाठ के स्वर के बीच जब श्रीराम धनुष के समीप पहुंचे, तो हर लीला प्रेमी की आंखें वहीं थम गईं।

7:30 बजे टूटा धनुष, सीता जी ने पहनाई जयमाल

ठीक 7:30 बजे जैसे ही धनुष भंग हुआ, आसमान में सफेद महताबी की चकाचौंध रोशनी बिखर गई। भग्न धनुष को थामे प्रभु श्रीराम की दिव्य आभा देखते ही बन रही थी। धनुष खंडन के बाद जगज्जननी माता सीता ने आगे बढ़कर प्रभु श्रीराम के गले में जयमाल डाली। इसके पश्चात दोनों स्वरूपों ने चारों दिशाओं में घूमकर आनंदित जनसमुदाय को अपना दिव्य दर्शन दिया।

सूर्य देव के रथ की दिशा बदलने की पौराणिक मान्यता

रामनगर की इस ऐतिहासिक रामलीला की जीवंतता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मानस के प्रसंगानुसार, धनुष टूटने की प्रचंड गर्जना से आकाश मार्ग में विचरण कर रहे भगवान सूर्य के रथ की दिशा बदल जाने का भाव बड़े ही सूक्ष्म और प्रामाणिक तरीके से दर्शाया गया। लीला प्रेमी मानस के इस एक-एक भाव में परमानंद की अनुभूति करते नजर आए।