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 रामनगर रामलीला: हनुमान जी ने फूँकी लंका, अशोक वाटिका प्रसंग पर सजल हुईं आँखें

समुद्र पार कर लंका पहुंचे पवनपुत्र; माता सीता से मिलन, लंकिनी का वध और लंका दहन की लीला देख भावुक हुए श्रद्धालु।

 

वाराणसी/रामनगर (भदैनी मिरर विशेष): काशी की सांस्कृतिक धरोहर और दुनिया भर में अपनी अनूठी परंपरा के लिए विख्यात रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में मंगलवार को एक बेहद रोमांचक और भक्तिभाव से परिपूर्ण प्रसंग का मंचन किया गया। रामलीला के 19वें दिन हनुमान जी का लंका आगमन, सीता खोज, लंका दहन और प्रभु श्रीराम से पुनर्मिलन की लीला का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

समुद्र लांघ लंका पहुंचे हनुमान जी, सुरसा और सिंहिका का किया उद्धार

कथा के क्रम में, आज के प्रसंग की शुरुआत प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद और 'प्रभु कर पंकज कपि के सिसा, सुमिरी सो दसा मगन गौरीशा' के जयघोष के साथ हुई। माता सीता की खोज में निकले हनुमान जी ने विशाल समुद्र को पार किया।

मार्ग में मयनाक पर्वत ने उन्हें विश्राम करने का आग्रह किया, किंतु राम काज की तड़प लिए हनुमान जी ने विनम्रता से आगे प्रस्थान किया। रास्ते में देवताओं द्वारा परीक्षा के रूप में भेजी गई सर्पों की माता सुरसा मिलीं, जिनके सामने हनुमान जी ने अपनी बुद्धि का परिचय देते हुए उनके मुख में प्रवेश कर चतुराई से बाहर आए। इसके पश्चात हनुमान जी ने परछाई पकड़ने वाली राक्षसी सिंहिका का वध किया।

लंकिनी का मान-मर्दन और अशोक वाटिका में सीता जी से मिलन

लंका नगरी में प्रवेश करते ही हनुमान जी को लंकिनी ने रोका, जिस पर हनुमान जी के एक ही मुष्टिका प्रहार से उसका अहंकार टूटा और उसे ब्रह्मा जी का वरदान स्मरण हो आया। लंका के वैभव और तामसी प्रवृत्ति को पार करते हुए हनुमान जी ने साधु वेश में विभीषण से भेंट की और उनका सत्कार प्राप्त कर अशोक वाटिका पहुंचे।

वाटिका में रावण द्वारा माता सीता को डराने-धमकाने और त्रिजटा द्वारा माता को धीरज बंधाने के प्रसंग का सजीव मंचन किया गया। इसके बाद हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम की मुद्रिका माता सीता को सौंपी। माता से आशीर्वाद और चूड़ामणि लेकर हनुमान जी ने अशोक वाटिका को उजाड़ा, रावण के घमंड को चूर किया और पूरी लंका को आग के हवाले कर दिया।

किष्किंधा वापसी और सुग्रीव द्वारा आरती

समुद्र पार कर पुनः किष्किंधा लौटे हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम को माता सीता की कुशलता और व्यथा का पूरा वृत्तांत सुनाया। यह सुनकर श्री राम ने भावुक होकर हनुमान जी को अपनी अनन्यता भक्ति प्रदान की। उपस्थित सभी भक्तों ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए। इसके पश्चात आज की लीला के विश्राम पर सुग्रीव जी द्वारा भव्य आरती संपन्न की गई, जिससे पूरा रामनगर क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।