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Mauni Amavasya 2026: काशी के 84 घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, गंगा स्नान और दान-पुण्य में लीन हैं श्रद्धालु

मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए काशी पहुंचे लाखों श्रद्धालु, प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन

 

वाराणसी। मौनी अमावस्या 2026 के पावन अवसर पर रविवार को काशी के घाटों पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। तड़के भोर से ही श्रद्धालुओं का रेला गंगा तट की ओर उमड़ पड़ा। काशी के 84 घाटों पर गंगा स्नान का सिलसिला चल रहा है। हर-हर गंगे और जय मां गंगा के जयघोष से घाट गूंज रहे है।

श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर दान-पुण्य, तिलदान और ब्राह्मण भोज करवा रहे है। बड़ी संख्या में लोगों ने तीर्थ-पुरोहितों और जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, श्री काल भैरव, संकटमोचन मंदिर, दुर्गाकुंड सहित काशी के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे है। मंदिर परिसरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रहीं है।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने दशाश्वमेध घाट से गोदौलिया और गिरिजाघर चौराहे तक नो-व्हीकल जोन लागू किया। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार घाटों और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बनाए रहे।

 गंगा स्नान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम और गंगा में देवताओं का वास होता है। इस कारण इस दिन किया गया गंगा स्नान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों में इस मास को कार्तिक मास के समान पुण्य मास बताया गया है।
मान्यता है कि इस अवधि में गंगा तट पर रहकर स्नान, ध्यान और साधना करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान के पश्चात सामर्थ्य अनुसार दान करना विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन तिल दान का भी खास महत्व है।

मौनी अमावस्या क्यों कहलाती है?

इस तिथि को मौनी अमावस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि व्रती व्यक्ति पूरे दिन मौन व्रत का पालन करता है। यह व्रत योग और आत्म-संयम पर आधारित माना गया है, जिससे मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि होती है।

मौनी अमावस्या पर क्या करें दान

ज्योतिषविदों के अनुसार चावल, दूध, मिश्री व चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान, सफेद वस्त्र, चांदी व अन्य सफेद रंग की वस्तुएं मौनी अमावस्या पर वस्तुओं का दान श्रेष्ठ फल देता है। 
यदि ब्राह्मण भोज संभव न हो, तो भोजन सामग्री के साथ नकद दक्षिणा देने से भी पुण्य लाभ प्राप्त होता है।