{"vars":{"id": "125128:4947"}}

भक्तों की डोली, भगवान का साथ: रथ पर सजने से पहले भक्तों से मिलने निकले जगन्नाथ

एक पखवाड़े के 'अनवसर' (स्वास्थ्य लाभ) के बाद भगवान जगन्नाथ ने दिए दर्शन, फूलों से सजी डोली को कंधा देने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़।

 

 

वाराणसी: धर्म और मोक्ष की नगरी काशी में भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी पारंपरिक डोली यात्रा बुधवार को बेहद श्रद्धा, अटूट आस्था और उल्लासपूर्ण माहौल में संपन्न हुई [cite: वाराणसी। काशी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक डोली यात्रा बुधवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हुई।, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा पर सदियों पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन]। करीब एक पखवाड़े (15 दिन) से अधिक समय तक 'अनवसर' (स्वास्थ्य लाभ) में रहने के बाद जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ डोली पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले [cite: पखवाड़े से अधिक समय तक अनवसर (स्वास्थ्य लाभ) में रहने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ डोली पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले।].

इस दौरान मंदिर परिसर में "हर-हर महादेव" और "जय जगन्नाथ" के गगनभेदी जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह भक्तिमय और अलौकिक हो उठा [cite: मंदिर परिसर में "हर-हर महादेव" और "जय जगन्नाथ" के जयघोष लगातार गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।].

फूलों से सजी डोली में विराजे भगवान, डमरू निनाद से गूंजी काशी

बुधवार दोपहर बाद जैसे ही मंदिर के पट खुले, वैसे ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष दिव्य श्रृंगार किया गया. तीनों विग्रहों को रंग-बिरंगे सुगंधित पुष्पों से सजी भव्य डोली में विराजमान कराया गया.

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/t_zuWagya9I?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/t_zuWagya9I/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" title="YouTube video player" width="560">

  • गर्भगृह की परिक्रमा: शंखनाद, डमरुओं की थाप और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच डोली को मंदिर के गर्भगृह की परिक्रमा कराई गई [cite: शंखनाद, डमरू और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच डोली को मंदिर के गर्भगृह की परिक्रमा कराई गई।].

  • पुष्पवर्षा से स्वागत: जैसे ही भगवान की डोली मुख्य परिसर से बाहर आई, वहां पहले से मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने उन पर फूलों की बारिश कर भव्य स्वागत किया.

  • कंधा देने की होड़: डोली को अपने कंधों पर उठाने के लिए भक्तों में गजब का उत्साह दिखा [cite: श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ डोली को अपने कंधों पर उठाया और प्रभु के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।, डोली को कंधा देने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला।]. मान्यता है कि भगवान की डोली को कंधा देने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है [cite: श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान की डोली को कंधा देने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।].

डमरू दल ने बांधा समां, सालभर रहता है इस पल का इंतजार

यात्रा के दौरान शामिल हुए विशेष डमरू दल ने अपने पारंपरिक और सधे हुए वादन से समां बांध दिया. डमरू और नगाड़ों की गूंज पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर थिरकते नजर आए.

दर्शन के लिए सुबह से ही कतारों में खड़े श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी सहेजा. भक्तों का कहना था कि उन्हें सालभर भगवान जगन्नाथ की इस डोली यात्रा के अद्भुत और आध्यात्मिक क्षण का इंतजार रहता है.

दशकों पुरानी परंपरा: आज से शुरू होगा ऐतिहासिक 'लक्खी मेला'

अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रभु की डोली यात्रा निकालने की यह परंपरा सदियों पुरानी है.

पहले के वर्षों में यह डोली यात्रा अस्सी स्थित मंदिर से शुरू होकर विभिन्न पारंपरिक मार्गों से होते हुए रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग तक जाती थी [cite: पूर्व वर्षों में यह यात्रा अस्सी स्थित मंदिर से विभिन्न मार्गों से होते हुए रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग तक जाती थी]. इसके अगले दिन यानी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से चतुर्थी तक काशी का विश्वप्रसिद्ध व ऐतिहासिक 'लक्खी रथयात्रा मेला' आयोजित किया जाता है.

दर्शन का समय: पुजारी जी ने बताया कि गुरुवार (16 जुलाई 2026) प्रातः काल 5:15 बजे से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के आम दर्शन पुनः सुचारू रूप से शुरू हो जाएंगे, जिसके लिए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं [cite: उन्होंने बताया कि गुरुवार प्रातः सुबह 5:15 बजे से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन पुनः आरंभ होंगे, जिसके लिए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।].