20 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है 'सदभावना दिवस'? जानिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से इसका खास कनेक्शन
पायलट से देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने तक का सफर, भारत में आईटी (IT) और टेलीकॉम क्रांति के जनक थे राजीव गांधी
भदैनी मिरर (Bhadaini Mirror) डेस्क: भारत में हर साल 20 अगस्त को 'सद्भावना दिवस' (Sadbhavana Diwas / Harmony Day) के रूप में मनाया जाता है। यह विशेष दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती का प्रतीक है। 'सद्भावना' शब्द का सीधा अर्थ 'सद्भाव, भाईचारा और सद्भावना' से है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य भारत की विविध संस्कृति, विभिन्न धर्मों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता, शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देना है।
वर्ष 1991 में राजीव गांधी की असामयिक मृत्यु के बाद, 1992 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा उनकी स्मृति में 'सद्भावना दिवस' मनाने की शुरुआत की गई थी।
पायलट से देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने तक का सफर
20 अगस्त 1944 को बॉम्बे (अब मुंबई) में जन्मे राजीव गांधी को राजनीति में कोई विशेष रुचि नहीं थी। वह पेशेवर रूप से 'इंडियन एयरलाइंस' में एक कमर्शियल पायलट के तौर पर काम कर रहे थे। हालांकि, 1980 में अपने छोटे भाई संजय गांधी के निधन के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री और अपनी मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, राजीव गांधी ने 40 वर्ष की आयु में देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था। उनका एक प्रसिद्ध विचार आज भी प्रासंगिक है:
"मैं युवा हूं और मेरा भी एक सपना है। मैं एक ऐसे मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और विश्व पटल पर मानव सेवा में अग्रणी भारत का सपना देखता हूं।"
भारत में आईटी (IT) और टेलीकॉम क्रांति के जनक
1984 से 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए राजीव गांधी ने देश को 21वीं सदी की ओर ले जाने का विजन रखा। उन्हें भारत में 'सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (IT & Telecom Revolution)' का जनक माना जाता है।
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कंप्यूटरीकरण: उन्होंने देश में कंप्यूटर और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया।
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सस्ता संचार: भारत में टेलीफोन और पीसीओ (PCO) नेटवर्क के विस्तार का श्रेय उनकी नीतियों को जाता है।
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युवाओं का अधिकार: उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत किया और मतदान की आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
वर्ष 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान लिट्टे (LTTE) के आत्मघाती हमले में उनकी जान चली गई थी। मरणोपरांत उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।
'सद्भावना प्रतिज्ञा' से राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश
सद्भावना दिवस के अवसर पर देश भर में सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों में 'सद्भावना प्रतिज्ञा' ली जाती है। इसमें नागरिक हिंसा का त्याग करने, सभी धार्मिक, भाषाई और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर सद्भाव से रहने की शपथ लेते हैं।