UPI Payment MDR Rules: फैसला हो चुका है, रोलबैक का सवाल नहीं... UPI पेमेंट पर MDR को लेकर सरकार का रुख एकदम साफ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 अक्टूबर से बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होने वाले नए नियमों को वापस नहीं लिया जाएगा। साथ ही, वित्त मंत्रालय ने विदेशी प्रभाव के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि 96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान अभी भी एमडीआर के दायरे से बाहर हैं।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए बड़े मर्चेंट पेमेंट पर नए नियमों को लेकर मचे घमासान के बीच सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय और शीर्ष अधिकारियों ने दो टूक कहा है कि यह सोच-समझकर लिया गया निर्णय है और इससे पीछे हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
क्या हैं नए नियम और आम जनता पर असर?
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आम जनता के लिए यूपीआई पूरी तरह मुफ्त: ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल पहले की तरह ही पूरी तरह से मुफ्त रहेगा। दोस्तों को पैसे भेजना, स्थानीय दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करना–इन सभी पर किसी तरह का कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा।
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96% ट्रांजैक्शन एमडीआर से बाहर: सरकार के अनुसार, कुल यूपीआई भुगतानों का 96 प्रतिशत हिस्सा मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
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बड़े मर्चेंट पेमेंट पर नियम: नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के बड़े मर्चेंट पेमेंट्स पर मामूली फीस लेने का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य इस डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और नवोन्मेषी बनाए रखना है।
विदेशी प्रभाव के दावों का खंडन
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर उन सभी दावों का जोरदार खंडन किया है, जिनमें यह कहा जा रहा था कि यूपीआई इकोसिस्टम में एमडीआर से जुड़े बदलाव किसी विदेशी दबाव या प्रभाव के कारण किए गए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 2016 में लॉन्च होने के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है, और भारत अपने नीतिगत फैसले पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से लेता है। हमारा मुख्य लक्ष्य एक आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम तैयार करना है, जैसा कि अकेले अगस्त महीने में 24.5 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस होने से साफ झलकता है।