{"vars":{"id": "125128:4947"}}

मिशन दिव्यास्त्र का अगला चरण! भारत ने किया एडवांस्ड 'अग्नि' मिसाइल का सफल परीक्षण, एक साथ कई दुश्मनों का होगा खात्मा

ओडिशा तट से दहाड़ी 'अग्नि': हिंद महासागर में साधे सटीक निशाने

 

नई दिल्ली/भुवनेश्वर: भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक उपलब्धियों वाला रहा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और सामरिक बल कमान (SFC) ने मिलकर 'मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल' (MIRV) तकनीक से लैस एडवांस्ड 'अग्नि' मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से संपन्न हुआ, जिसने भारत की रणनीतिक मारक क्षमता को दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में और मजबूती से खड़ा कर दिया है।

हिंद महासागर में दिखा शक्ति प्रदर्शन

परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपनी उन्नत तकनीक का लोहा मनवाया। इसके भीतर मौजूद कई पेलोड्स (वॉरहेड्स) ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर स्थित लक्ष्यों को पूरी सटीकता के साथ भेदा। रडार, टेलीमेट्री और समुद्र में तैनात शिप-बेस्ड स्टेशनों ने पुष्टि की है कि मिशन के सभी उद्देश्य शत-प्रतिशत सफल रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अग्नि-5 का उन्नत संस्करण या अगली पीढ़ी की मिसाइल हो सकती है, जो हाइपरसोनिक क्षमताओं से भी लैस है।

क्या है MIRV तकनीक की ताकत?

MIRV यानी ऐसी तकनीक जिसमें एक ही मिसाइल अपने साथ कई परमाणु हथियार ले जा सकती है।

  • मल्टीपल टारगेट्स: यह तकनीक मिसाइल को इस काबिल बनाती है कि वह एक ही लॉन्च में अलग-अलग दिशाओं में मौजूद कई ठिकानों को तबाह कर सके।

  • डिफेंस सिस्टम को मात: इसकी गति और अलग-अलग वॉरहेड्स की वजह से दुश्मन का मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक करने या रोकने में नाकाम साबित होता है।

  • रणनीतिक बढ़त: भारत ने इससे पहले मार्च 2024 में 'मिशन दिव्यास्त्र' के जरिए अपनी ताकत दिखाई थी, लेकिन ताजा परीक्षण और भी घातक मारक क्षमता की पुष्टि करता है।

बांग्लादेश में 'अग्नि' का खौफ और कौतूहल

इस मिसाइल परीक्षण का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। लॉन्च के बाद आसमान में बनी चमकदार रोशनी (Plume) पश्चिम बंगाल और ओडिशा के साथ-साथ पड़ोसी देश बांग्लादेश के सिताकुंडा और कॉक्स बाजार जैसे इलाकों में भी साफ देखी गई। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके वीडियो शेयर करते हुए इसे 'अज्ञात उड़ती वस्तु' या 'आग की लकीर' बताया, जिसने कुछ समय के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कयासों का बाजार गर्म कर दिया।

स्वदेशी उद्योगों की बड़ी जीत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी पर DRDO और भारतीय सेना के साथ-साथ उन निजी उद्योगों को भी बधाई दी है, जिन्होंने इस मिसाइल के निर्माण में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह सफलता भारत की रक्षा तैयारियों को "अविश्वसनीय मजबूती" प्रदान करेगी।

यह परीक्षण साफ संकेत है कि भारत अब न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि लंबी दूरी (5,000 से 10,000 किमी तक) की स्ट्राइक क्षमता विकसित कर चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के संदर्भ में एक सशक्त 'निवारक' (Deterrent) के रूप में उभर चुका है।