'बिट्टू तबाही' का जलवा, BSc छात्र ने अकेले चमकाई अजनार नदी; CM ने की तारीफ
राजगढ़ के 21 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी की अनूठी पर्यावरण पहल; सोशल मीडिया पर वायरल हुई नदी की 'बिफोर-आफ्टर' तस्वीरें, 14.77 करोड़ से बनेगा STP
भदैनी मिरर (पर्यावरण/नेशनल डेस्क): समाज में बदलाव लाने के लिए भीड़ की नहीं, बल्कि एक मजबूत इरादे और सच्ची पहल की जरूरत होती है। इस बात को साबित कर दिखाया है मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले अंतर्गत ब्यावरा के रहने वाले 21 वर्षीय बीएससी (BSc) छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी ने, जिन्हें सोशल मीडिया पर लोग 'बिट्टू तबाही' के नाम से जानते हैं। बिट्टू ने प्रदूषण और कचरे से पटी पड़ी अजनार नदी को अकेले ही चमकाने का बीड़ा उठाया और अपनी लगन से इतिहास रच दिया।
26 जनवरी से शुरू की थी मुहिम, झेले गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
बिट्टू ने इस वर्ष 26 जनवरी से अजनार नदी से कचरा, प्लास्टिक और मलबा हटाने का काम लगभग अकेले ही शुरू किया था। इस दौरान उन्हें भारी कठिनाइयों और स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ा:
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संक्रमण और जहरीले जीव: मंदिर के पास कचरा साफ करते समय उन्हें शारीरिक संक्रमण हो गया और सफाई के दौरान कई बार जहरीले सांपों से भी सामना हुआ।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें: जब बिट्टू ने नदी की सफाई से पहले (Before) और बाद (After) की तस्वीरें 'बिट्टू तबाही' हैंडल से शेयर कीं, तो उनकी मेहनत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की सराहना
बिट्टू के इस प्रयास की जानकारी जब राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची, तो उन्होंने स्वयं बिट्टू से मुलाकात की और उनके जज्बे की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि "जब एक अकेला युवा नदी को बचाने का कड़ा संकल्प ले सकता है, तो हम सब मिलकर अपने जल स्रोतों को जीवनदायी बना सकते हैं।" उन्होंने कहा कि बिट्टू की यह पहल मध्य प्रदेश सरकार के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का एक जीवंत उदाहरण है।
प्रशासन आया मदद को आगे, 14.77 करोड़ से बनेगा STP
बिट्टू के जुनून को देखकर ब्यावरा नगर पालिका प्रशासन भी हरकत में आया। सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम ने बताया कि पालिका द्वारा नदी से भारी कचरा हटाने के लिए पोक्लेन जैसी बड़ी मशीनें तैनात की गईं। बिट्टू से प्रेरित होकर अब स्थानीय नागरिक भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
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स्थायी समाधान की तैयारी: नदी में गिरने वाले 5 बड़े गंदे नालों को रोकने के लिए प्रशासन ने 14.77 करोड़ रुपये की लागत से 'सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट' (STP) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है, ताकि नदी में गंदा पानी जाना हमेशा के लिए बंद हो सके।