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देशव्यापी छात्र आंदोलन के आगे झुकी केंद्र सरकार, संसद में पेश हुआ एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक; 10 साल की सजा और 10 करोड़ तक का जुर्माना

नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर हुए भारी जनआक्रोश के बाद केंद्र सरकार ने 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' लोकसभा में पेश कर दिया है। नए विधेयक में पेपर लीक माफियाओं पर 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं।

 

भदैनी मिरर न्यूज नेटवर्क

देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रचंड छात्र आंदोलन और राजनीतिक दबाव के बाद अंततः केंद्र सरकार बैकफुट पर आ गई है। सोमवार (27 जुलाई 2026) को संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' (Public Examinations Amendment Bill, 2026) पेश किया।

विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और बल प्रयोग के विरोध में जमकर नारेबाजी और हंगामा किया।

विधेयक के मुख्य और कड़े प्रावधान

  1. सजा और जुर्माने में भारी बढ़ोतरी:

    • अनुचित साधनों (Unfair Means) का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के लिए सजा को बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष का कारावास करने का प्रस्ताव है।

    • व्यक्तिगत जुर्माने की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर अधिकतम ₹50 लाख कर दिया गया है।

  2. संगठित पेपर लीक माफियाओं पर शिकंजा:

    • यदि पेपर लीक या परीक्षा धांधली किसी गिरोह (Organised Crime) द्वारा की जाती है, तो दोषियों को कम से कम 7 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक का भारी जुर्माना भरना होगा।

  3. 15 गैर-कानूनी गतिविधियां चिन्हित:

    • नए विधेयक के तहत प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर (OMR) शीट में फेरबदल करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना जैसी कुल 15 गतिविधियों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

  4. स्पेशल टास्क फोर्स (STF) करेगी जांच:

    • केंद्र सरकार के पास पेपर लीक मामलों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force) गठित करने का अधिकार होगा। पुलिस या केंद्रीय जांच एजेंसियों को अपनी जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होगी।

  5. फास्ट ट्रैक कोर्ट और 3 महीने में फैसला:

    • विधेयक के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' स्थापित करने होंगे। लंबित मामलों को इन अदालतों में स्थानांतरित कर 3 महीने के भीतर निस्तारित किया जाएगा।

देशव्यापी छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

गौरतलब है कि यह सख्त कानून कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) के नेतृत्व में 6 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विशाल छात्र आंदोलन का परिणाम है। 20 जुलाई को जब पुलिस ने अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल पहुंचाया, तो हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए थे।

पुलिसिया लाठीचार्ज, आंसू गैस और दमनकारी कार्रवाई के बावजूद छात्रों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। चौतरफा दबाव के बीच 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद छात्र संगठनों ने अपना आंदोलन स्थगित किया था।