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Tejas Mk1A: अमेरिकी कंपनी GE ने HAL को सौंपे 3 और इंजन, तेजी से शुरू होगा स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों का प्रोडक्शन

F404-IN20 इंजनों की कुल संख्या 10 हुई; दिसंबर 2026 तक 22 इंजन हासिल करने का लक्ष्य, भारतीय वायुसेना की बढ़ेगी ताकत

 

भदैनी मिरर (डिफेंस डेस्क): भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम 'तेजस एमके1ए' (Tejas Mk1A) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी जीई (GE Aerospace) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को अगस्त 2026 में तीन और F404-IN20 जेट इंजनों की नई खेप सौंप दी है।

इस नई आपूर्ति के साथ ही एचएएल को अब तक कुल 10 एफ404 इंजन प्राप्त हो चुके हैं। इंजनों की डिलीवरी में आ रही तेजी से अब तेजस एमके1ए का प्रोडक्शन शेड्यूल पटरी पर लौटता दिख रहा है।

दिसंबर तक 22 इंजन हासिल करने का लक्ष्य

इससे पहले जुलाई 2026 में सातवां इंजन एचएएल को मिला था। जीई एयरोस्पेस और एचएएल के अधिकारियों के अनुसार, सप्लाई नेटवर्क में सुधार के बाद अब आने वाले महीनों में इंजनों की आपूर्ति और तेज होगी।

  • 2026 का लक्ष्य: एचएएल ने इस साल दिसंबर तक कुल 22 इंजन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है ताकि एयरक्राफ्ट असेंबली लाइन को तेजी से चालू कर भारतीय वायुसेना को विमानों की डिलीवरी शुरू की जा सके।

  • कुल ऑर्डर: जीई एयरोस्पेस के पास पहले चरण के तहत कुल 99 F404-IN20 इंजनों की आपूर्ति का ठेका है, जो तेजस एमके1ए सिंगल-इंजन फाइटर का मुख्य पावरप्लांट है।

इंजनों की कमी से क्यों थमी थी रफ्तार?

रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में एचएएल के साथ ₹48,000 करोड़ का ऐतिहासिक समझौता किया था। इसके तहत भारतीय वायुसेना को 83 तेजस एमके1ए (73 फाइटर जेट और 10 ट्रेनर विमान) की आपूर्ति की जानी है। योजना के अनुसार, शुरुआत में प्रतिवर्ष 16 विमान तैयार करने का लक्ष्य था, लेकिन जीई द्वारा वैश्विक सप्लाई चेन बाधाओं के कारण इंजनों की देरी से उत्पादन गति धीमी हो गई थी।

अब इंजनों की नियमित खेप पहुंचने से एचएएल अपनी उत्पादन इकाइयों की रफ्तार बढ़ा सकेगा, जिससे भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को फिर से मजबूत करने में मदद मिलेगी।