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 'सिंधु जल संधि का निलंबन देशहित में', 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 80वें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को किया संबोधित; जानिए उनके संबोधन की 7 सबसे बड़ी और अहम बातें

 

भदैनी मिरर (राष्ट्रीय डेस्क): भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश और विदेश में रह रहे सभी भारतीयों को संबोधित किया और आजादी की शुभकामनाएं दीं। अपने ओजस्वी भाषण में राष्ट्रपति ने 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को दोहराते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में बढ़-चढ़कर योगदान देने का आह्वान किया।

संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने आतंकवाद को पनाह देने वाले पड़ोसी देश के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के फैसले को राष्ट्रीय हित में लिया गया ऐतिहासिक कदम बताया। इसके साथ ही उन्होंने विदेश नीति, सरदार पटेल के योगदान, जनकल्याणकारी योजनाओं और सारनाथ को मिली यूनेस्को की मान्यता पर प्रमुखता से बात रखी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन की 7 प्रमुख बातें

1. राष्ट्रीय हित में सिंधु जल संधि को निलंबित करना

राष्ट्रपति मुर्मू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद को शह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रीय हित में है। यह कदम विशेष रूप से देश के किसानों के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें जल संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक फैसला है।

2. 'विकसित भारत 2047' और नागरिकों का योगदान

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 2047 तक भारत को एक पूरी तरह से विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हर नागरिक—विद्यार्थी, शिक्षक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, किसान और मजदूर—को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए देश की प्रगति में सहयोग देना होगा।

3. जनभागीदारी पर आधारित भारत का संविधान

संविधान को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारा संविधान जन-भागीदारी पर टिका हुआ है। उन्होंने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' को याद करते हुए उन लाखों लोगों के संघर्ष और पहचान को नमन किया जो सांप्रदायिक हिंसा के कारण विस्थापित हुए थे।

4. राष्ट्रीय हित से संचालित मजबूत विदेश नीति

राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत की विदेश नीति पूरी तरह देश हित को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। दुनिया भर में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है और कई वैश्विक शक्तियों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए गए हैं। भारत 'ग्लोबल साउथ' के देशों का प्रमुखता से नेतृत्व कर रहा है।

5. सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन

आधुनिक भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के समय 550 से अधिक देशी रियासतों का भारत में विलय कराना एक ऐतिहासिक चुनौती थी, जिसे सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से पूरा किया।

6. गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा का बड़ा दायरा

सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का खाका प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया:

  • देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।

  • जनधन योजना के तहत करीब 59 करोड़ लोग बैंकिंग प्रणाली से जुड़े, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं।

  • 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की सुविधा दी जा रही है।

  • आयुष्मान भारत योजना से 60 करोड़ नागरिकों को ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज का सुरक्षा कवच मिला है।

7. सांस्कृतिक पहचान: सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर का दर्जा

देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले साल जहां मराठा सैन्य परंपरा के 12 किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था, वहीं इस साल भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ (वाराणसी) को भी UNESCO विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला है। यह पूरे देश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।