NEET मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: NTA को लगाई कड़ी फटकार, कहा- 'बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करें'; अब PM मोदी खुद संभाल रहे कमान
नीट परीक्षा विवाद को लेकर SC ने पूछा- आखिर जवाबदेही किसकी? एनटीए (NTA) को खत्म करने की उठी मांग, केंद्र ने कोर्ट को दिया सुरक्षा का भरोसा.
नई दिल्ली (भदैनी मिरर): देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर उपजा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा में बार-बार हो रही गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई है. शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि बच्चों और उनके परिवारों के लिए यह पूरा मामला बेहद दर्दनाक और मानसिक रूप से परेशान करने वाला है.
अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, अपना समय, पैसा और भावनाएं इस परीक्षा में लगाते हैं. ऐसे में अगर हर साल परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे, तो यह पूरे एजुकेशन सिस्टम पर एक बड़ा दाग है.
'पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था कहां है?' - सुप्रीम कोर्ट का सीधा सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने एनटीए और पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर के. राधाकृष्णन से सीधे सवाल दागे. कोर्ट ने पूछा, "आपने पहले कहा था कि एक मजबूत और सुरक्षित व्यवस्था बनाई जाएगी, फिर हर बार ऐसी गड़बड़ियां और पेपर लीक जैसी घटनाएं कैसे सामने आ रही हैं?"
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा ने निगरानी तंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कागजों पर सिफारिशें बना देना काफी नहीं है. असली सवाल यह है कि उन्हें जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया कितनी मजबूत थी. अगर एक उच्च स्तरीय समिति बनने के बाद भी खामियां आ रही हैं, तो या तो सिफारिशों में कमी है या फिर उन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया.
'जिम्मेदारी किसी के कंधे पर तय होनी चाहिए', जवाबदेही की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा जोर व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने पर दिया. अदालत ने कहा कि यह साफ होना चाहिए कि इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार कौन है. कोर्ट ने कहा:
"सिस्टम की खामी कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता. जिम्मेदारी किसी के कंधे पर तय होनी चाहिए. हमें बताइए कि आखिर वह जवाबदेह व्यक्ति कौन है?"
NTA को पूरी तरह खत्म करने की उठी मांग
इस बीच, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि बार-बार विफल साबित हो रही एनटीए (NTA) को या तो पूरी तरह खत्म कर दिया जाए या फिर इसके पूरे ढांचे में आमूल-चूल बदलाव किया जाए. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं पारदर्शिता से कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र संस्था का गठन होना चाहिए.
राधाकृष्णन समिति ने कोर्ट में क्या दलील दी?
अदालत में मौजूद पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर के. राधाकृष्णन ने समिति की ओर से पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि समिति ने लगभग 35 लंबी अवधि और 60 छोटी अवधि की सिफारिशें सौंपी थीं, जिनमें से ज्यादातर सुझावों को लागू भी कर दिया गया है. हालांकि, कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आया और कहा कि अगर सुधार लागू हो चुके थे, तो फिर दोबारा गड़बड़ी कैसे हुई?
NEET UG परीक्षा के लिए क्या हैं नए सुरक्षा इंतजाम?
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनटीए ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि आगामी परीक्षाओं के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं, जिनमें आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है:
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बायोमेट्रिक और फेस वेरिफिकेशन: परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों का पूरी तरह से जैविक पहचान सत्यापन और चेहरे की पहचान की जांच की जा रही है.
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AI और सीसीटीवी निगरानी: सभी परीक्षा केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी कैमरों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित गड़बड़ी पकड़ने वाली तकनीक का उपयोग किया जा रहा है.
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सिग्नल जैमर और पुलिस बल: परीक्षा के दौरान मोबाइल संकेत अवरोधक (जैमर) लगाए गए हैं और प्रश्न पत्रों के सुरक्षित परिवहन व भंडारण के लिए पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है.
केंद्र सरकार का पक्ष: पीएम मोदी खुद रख रहे हैं नजर
एनटीए की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ काम कर रही है. उन्होंने कोर्ट को एक बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद व्यक्तिगत रूप से इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं.
तुषार मेहता ने कहा कि भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए एक व्यापक तंत्र तैयार किया जा रहा है. हालांकि, सुरक्षा कारणों से सभी उपायों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करने से असामाजिक तत्वों को मौका मिल सकता है.