Supreme Court Order: निचली अदालतों के जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़कर होगी 62 वर्ष
CJI सूर्यकांत की बेंच का ऐतिहासिक फैसला; 31 मार्च 2026 के बाद सेवानिवृत्त जजों को भी दोबारा सेवा का विकल्प देने के निर्देश, दो महीने में संशोधन का अल्टीमेटम
भदैनी मिरर (नेशनल डेस्क): देश की न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने और अदालतों में लंबित मुकदमों के तेजी से निपटारे के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सात राज्यों की निचली अदालतों (जिला न्यायपालिका) में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का कड़ा निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुभवी न्यायिक प्रतिभाओं को समय से पहले बाहर होने से रोकना बेहद जरूरी है, ताकि जजों की कमी के कारण आम जनता को समय पर न्याय पाने के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
CJI सूर्यकांत की तीन सदस्यीय पीठ का बड़ा निर्देश
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को अपने न्यायिक सेवा सेवानिवृत्ति नियमों में तत्काल संशोधन करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु:
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पुनः सेवा का विकल्प: इन राज्यों में 31 मार्च 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए न्यायिक अधिकारियों को 62 वर्ष की आयु तक दोबारा पद संभालने का विकल्प मिलेगा (बशर्ते उन्होंने इस अवधि में कोई दूसरी नौकरी न स्वीकार की हो)।
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दो महीने की समयसीमा: राज्यों को 2 महीने के भीतर अपने सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन करने होंगे।
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कार्य-प्रदर्शन का आकलन: जब तक नियम संशोधित नहीं होते, 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके किसी जज को तब तक रिटायर न किया जाए जब तक संबंधित हाई कोर्ट उनके कार्य और उपयुक्तता का मूल्यांकन न कर ले।
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24 राज्यों को 2 हफ्ते का अल्टीमेटम: SC ने अन्य 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से भी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर पुनर्विचार करने को कहा है और 2 सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) मांगी है।
'वित्तीय बोझ का बहाना बनाकर विरोध करना अनुचित'
सुनवाई के दौरान राज्यों द्वारा उठाए गए आर्थिक तर्कों को खारिज करते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि “वित्तीय बोझ का हवाला देकर जजों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का विरोध करना कोई उचित आधार नहीं है।”
न्यायालय ने कहा कि यह व्यवस्था अनुभवी जजों के मार्गदर्शन को बनाए रखने और नई युवा प्रतिभाओं के प्रवेश के बीच एक बेहतर संतुलन कायम करेगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष और हाई कोर्ट के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।
इंसाफ की प्रक्रिया में आएगी तेजी
मुकदमों के भारी बोझ से दब रही जिला न्यायपालिका के लिए यह फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में भी माना है कि 'इंसाफ में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है' जो कि मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है। सेवानिवृत्ति आयु में इस बढ़ोतरी से निचली अदालतों में जजों के खाली पदों की समस्या काफी हद तक हल होगी, जिससे आम नागरिकों को त्वरित न्याय मिल सकेगा।