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Supreme Court: 'मुख्यमंत्री का दौरा रोकना हमारा काम नहीं', थलापति विजय के खिलाफ DMK की याचिका पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

TVK vs DMK: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करूर दौरे पर रोक लगाने वाली द्रमुक (DMK) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त। कोर्ट ने कहा- क्या आप अभिव्यक्ति की आजादी को भी रोकना चाहते हैं?

 

 

नई दिल्ली/चेन्नई (भदैनी मिरर ब्यूरो): तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और 'तमिलगा वेत्री कषगम' (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) के खिलाफ सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने DMK को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि "अदालत का काम किसी मुख्यमंत्री के दौरे या उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करना नहीं है।"

जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से तीखे सवाल किए और कहा कि क्या आप लोग अब कोर्ट से यह तय कराना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री को क्या करना चाहिए और क्या नहीं? अदालत के कड़े रुख और याचिका खारिज करने की चेतावनी के बाद DMK ने अपनी याचिका वापस ले ली।

क्या थी DMK की याचिका और आपत्ति?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय आगामी 10 जुलाई को करूर का दौरा करने वाले हैं, जहां एक रैली के दौरान हुई भगदड़ में कम से कम 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

DMK ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि सीएम विजय और राज्य के मंत्री आधव अर्जुन करूर का दौरा करके और पीड़ितों के परिवारों से मिलकर मामले के गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। द्रमुक के वकीलों ने मांग की थी कि सीबीआई (CBI) जांच लंबित रहने तक मुख्यमंत्री के दौरों, सार्वजनिक बयानों और पीड़ितों से उनकी बातचीत को कोर्ट द्वारा नियंत्रित या रोक दिया जाए।

'मुलाकात करना गवाहों को प्रभावित करना कैसे हुआ?' - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने DMK के तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा:

"कोई अदालत किसी मुख्यमंत्री के दौरे को कैसे नियंत्रित कर सकती है? भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों से मिलना गवाहों को प्रभावित करना कैसे माना जा सकता है?"

अदालत ने आगे कहा कि क्या आप लोग देश में अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Speech) पर भी रुकावट पैदा करना चाहते हैं? अगर आपको अपनी बात रखने का हक है, तो किसी दूसरे को क्यों नहीं?

आधव अर्जुन के बयान से गरमाई थी राजनीति

याचिका में टीवीके (TVK) विधायक और मंत्री आधव अर्जुन के पिछले हफ्ते दिए गए एक सार्वजनिक बयान का भी हवाला दिया गया था। आधव अर्जुन ने कथित तौर पर कहा था कि करूर की घटना का "हिसाब चुकता करना अभी बाकी है" और उन्होंने पिछली द्रमुक सरकार पर पुलिस के जरिए करूर के लोगों की "हत्या" करवाने का गंभीर आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही गठित की है निगरानी समिति

गौरतलब है कि करूर भगदड़ मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही बड़ा कदम उठा चुका है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई (CBI) जांच की निगरानी के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) और एकल सदस्यीय जांच आयोग के निर्देशों पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को केंद्रीय एजेंसी को पूरा सहयोग देने का आदेश दिया था।

हादसे की वजह: इससे पूर्व पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि रैली में उम्मीद से तीन गुना अधिक (लगभग 27,000) लोग शामिल हुए थे और सीएम विजय के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में हुई 7 घंटे की देरी इस दुखद हादसे की मुख्य वजह बनी थी।