रिहायशी इलाकों में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, पूरे देश में बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई के आदेश
26 हजार से ज्यादा अवैध मामलों पर पूर्व निगमायुक्त को नोटिस
देश भर में वर्षों से रिहायशी इलाकों में चल रही अवैध वाणिज्यिक (कमर्शियल) गतिविधियों और अनाधिकृत निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली, लखनऊ, पटना समेत कई प्रमुख शहरों में नियमों की अनदेखी कर बनाई गई इमारतों के खिलाफ युद्ध स्तर पर सख्त कार्रवाई और बुलडोजर/सीलिंग एक्शन के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इस मामले में ढिलाई बरतने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को भी कड़ी फटकार लगाई है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली के होटलों और लखनऊ के कोचिंग सेंटरों में आग लगने की घटनाओं में कई मासूम लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
दिल्ली: एमसीडी और एनडीएमसी को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के लाजपत नगर और सरोजिनी नगर मार्केट में नियमों के उल्लंघन तथा इमारतों की मजबूती जांचने के लिए सर्वे शुरू न होने पर दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) को आड़े हाथों लिया।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 9 जुलाई को IIT दिल्ली के दो प्रोफेसरों की सदस्यता वाली एक विशेषज्ञ समिति बनाने का आदेश दिया था, ताकि क्षेत्र में किसी भी संभावित अनहोनी को रोका जा सके। आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई।
पटना: 26 हजार से ज्यादा अवैध मामलों पर पूर्व निगमायुक्त को नोटिस
पटना नगर निगम द्वारा दाखिल हलफनामे में खुलासा हुआ कि रिहायशी संपत्तियों का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए करने के कुल 26,746 मामले सामने आए हैं।
इस आंकड़े पर सख्त टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है। कोर्ट ने लगभग चार साल तक पटना के निगमायुक्त रहे अधिकारी (पराशर) को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि इतने बड़े पैमाने पर हुई अनदेखी के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
लखनऊ: एलडीए को तीन सप्ताह में सर्वे पूरा करने का निर्देश
शीर्ष अदालत ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को भी दिल्ली की तर्ज पर पूरे शहर में रिहायशी इलाकों में चल रहीं व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों का गहन सर्वे कराने का आदेश दिया है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने पीठ को बताया कि शुरुआती चरण में 51 अवैध संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने हलफनामा देकर अदालत को आश्वस्त किया कि पूरे एलडीए क्षेत्र में यह अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जाएगा और अगले तीन सप्ताह में सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
किन इमारतों पर लटकी कार्रवाई की तलवार?
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रिहायशी क्षेत्रों में संचालित दुकानें, दफ्तर, होटल और कोचिंग सेंटर।
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बिना स्वीकृत नक्शे या भवन निर्माण नियमों (Building Bye-laws) को दरकिनार कर बनीं बहुमंजिला इमारतें।
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सुरक्षा मानकों (Fire Safety & Structural Audit) की अनदेखी करने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठान।
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब देश भर के प्रमुख महानगरों में अवैध इमारतों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।