रिकवरी के नाम पर गुंडागर्दी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: RBI को निर्देश— बैंकों और NBFCs द्वारा ज़बरदस्ती गाड़ियां ज़ब्त करने पर लगाएं लगाम
"कागजों पर सिमट कर रह गए नियम"; आधी रात को ट्रक छीनने वाली फाइनेंस कंपनी पर ठोका ₹10 लाख का जुर्माना, जारी किए 10 बड़े सिद्धांत
नई दिल्ली / भदैनी मिरर: लोन रिकवरी और वाहनों की जब्ती के नाम पर रिकवरी एजेंटों और वित्तीय संस्थानों की दबंगई पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सख्त निर्देश दिया है कि वह बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) द्वारा वसूली के लिए जारी गाइडलाइंस और मास्टर सर्कुलर का सख्ती से पालन कराए।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:
"दो दशकों से गाइडलाइंस होने के बावजूद वसूली के नाम पर मनमानी जारी है। RBI द्वारा जारी निर्देश केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं और उन्हें लागू करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। किसी भी नागरिक से आधी रात को बिना पूर्व सूचना या कानूनी प्रक्रिया के उसकी आजीविका का साधन नहीं छीना जा सकता।"
पीड़ित ट्रक मालिक को ₹10 लाख मुआवजे का आदेश
यह ऐतिहासिक फैसला चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से जुड़े एक मामले में आया। पीड़ित ट्रक मालिक का आरोप था कि वर्ष 2023 में रात करीब 1:00 बजे चार अज्ञात लोगों ने सीसीटीवी (CCTV) निगरानी में खड़े उनके ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़ा और उसे जबरन चलाकर ले गए। बाद में कंपनी ने बिना उचित नोटिस दिए गाड़ी को औने-पौने दामों में बेच दिया।
अदालत ने इसे गैर-कानूनी और 'गुंडागर्दी' करार देते हुए हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया और फाइनेंस कंपनी को निर्देश दिया कि:
-
पीड़ित के दोनों लोन अकाउंट तत्काल प्रभाव से बंद किए जाएं।
-
गाड़ी की बिक्री से प्राप्त ₹4,50,000 की राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाई जाए।
-
पीड़ित को हुई मानसिक प्रताड़ना और आजीविका के नुकसान के एवज में ₹10 लाख का मुआवजा और ₹50,000 केस का खर्च दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए 10 प्रमुख सिद्धांत:
-
उत्पीड़न पर रोक: लोन वसूली के लिए कर्जदारों को अजीब समय पर फोन करके या ताकत का इस्तेमाल करके परेशान नहीं किया जा सकता।
-
गुंडों के इस्तेमाल पर पाबंदी: गाड़ियां ज़ब्त करने के लिए बैंक या फाइनेंस कंपनियां रिकवरी एजेंटों या 'गुंडों' की मदद नहीं ले सकतीं।
-
उचित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन: रिकवरी एजेंट नियुक्त करने से पहले RBI की आउटसोर्सिंग गाइडलाइंस के तहत पूरी सावधानी बरतनी होगी।
-
कानूनी एग्रीमेंट: संपत्ति ज़ब्ती का नियम इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, 1872 के अनुरूप होना चाहिए।
-
BCSBI कोड का पालन: एजेंटों को बैंकिंग कोड्स एंड स्टैंडर्ड्स बोर्ड ऑफ इंडिया के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
-
शिकायतों पर कड़ा एक्शन: रिकवरी एजेंटों की बदसलूकी की शिकायतों को RBI बेहद गंभीरता से लेगा।
-
एजेंट बैन करने का अधिकार: बार-बार नियम तोड़ने वाले बैंकों/NBFCs को विशेष इलाकों में एजेंट रखने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
-
स्पष्ट री-पजेशन पॉलिसी: गाड़ी ज़ब्त करने से पहले पूर्व नोटिस पीरियड, बकाया चुकाने का अंतिम अवसर और संपत्ति वापसी की पारदर्शी प्रक्रिया तय होनी चाहिए।
-
क्रेडिट काउंसलर और स्थानीय भाषा: NBFC-माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को अपनी शाखाओं में स्थानीय भाषा में 'उचित व्यवहार संहिता' (Fair Practice Code) प्रदर्शित करनी होगी।
-
निर्धारित स्थान पर वसूली: वसूली केवल तय केंद्रीय स्थान पर होगी। फील्ड स्टाफ के पास न्यूनतम योग्यता व ट्रेनिंग होना अनिवार्य है; कर्जदार के घर केवल विशेष परिस्थितियों (जब वह बार-बार न आए) में ही जाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस फैसले और निर्देशों की प्रति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को तत्काल कार्रवाई हेतु भेज दी है।