राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं का मामला: NHAI पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कहा— राज्यों और स्थानीय निकायों की है मुख्य जिम्मेदारी
NHAI ने सुप्रीम कोर्ट से 19 मई के आदेश पर स्पष्टीकरण की मांग की; कहा- हाईवे पर समन्वय करेंगे, लेकिन गौशाला और आश्रय स्थल बनाना राज्यों का काम।
भदैनी मिरर डेस्क: राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे पर आवारा मवेशियों के कारण होने वाले हादसों और सुरक्षा के मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। NHAI ने शीर्ष अदालत के 19 मई 2026 के आदेश पर स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा है कि सड़कों से आवारा पशुओं को पकड़ने, उन्हें हटाने और उनके लिए आश्रय स्थल (गौशालाएं) बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और जिला स्तरीय हाईवे प्रशासन की है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के समक्ष NHAI की इस अर्जी का तत्काल उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई का अनुरोध किया, जिस पर CJI ने मामले को संबंधित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।
किस निर्देश पर NHAI ने मांगा स्पष्टीकरण?
NHAI ने यह अर्जी सुओ-मोटू याचिका (In Re: “City Hounded by Strays, Kids Pay Price”) के तहत दाखिल की है। प्राधिकरण ने विशेष रूप से कोर्ट के Direction G (निर्देश जी) पर स्पष्टीकरण की मांग की है।
इस निर्देश के तहत NHAI को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर राजमार्गों पर आवारा पशुओं से निपटने के लिए एक व्यापक व्यवस्था बनाने का आदेश दिया गया था। NHAI का कहना है कि इस निर्देश का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि उसे पूरे देश में खुद पशु आश्रय केंद्र, गौशालाएं, चारा और परिवहन व्यवस्था स्थापित और संचालित करनी होगी।
NHAI ने दिए अपने वैधानिक तर्क
NHAI ने अपनी अर्जी में National Highways Authority of India Act, 1988 और Control of National Highways (Land and Traffic) Act, 2002 के कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया:
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मुख्य दायित्व: प्राधिकरण का प्राथमिक वैधानिक कार्य राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण, विकास, रखरखाव और ट्रैफिक प्रबंधन करना है।
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हाईवे प्रशासन की भूमिका: 29 अक्टूबर 2025 की केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, संबंधित क्षेत्रों के जिलाधिकारियों (District Magistrates) को ही 'हाईवे प्रशासन' नियुक्त किया गया है। इसलिए आवारा मवेशियों को हटाने का सीधा दायित्व स्थानीय प्रशासन और राज्यों का बनता है।
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बजट की सीमा: NHAI ने स्पष्ट किया कि पूरे देश के हाईवे नेटवर्क पर पशु आश्रय केंद्र बनाने, जमीन अधिग्रहण, चारे, पशु चिकित्सकों और विशेष कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए उसके पास कोई अलग बजटीय प्रावधान (Budgetary Provision) नहीं है।
NHAI समन्वय और सहयोग के लिए तैयार
सुप्रीम कोर्ट में दिए गए अपने आवेदन में NHAI ने यह साफ किया है कि वह सड़क सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अदालती निर्देशों के पालन में पूरा सहयोग करेगा।
प्राधिकरण ने कहा कि वह हाईवे पर संवेदनशील (Accident-Prone) स्थानों की पहचान करने, पशुओं को पकड़ने की प्रक्रिया में मदद करने और राज्यों व गौशालाओं के साथ आवश्यक समन्वय (Coordination) स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। NHAI ने कोर्ट से केवल यह स्पष्ट करने की मांग की है कि उसकी भूमिका मुख्य रूप से सहयोगी और समन्वयक की होगी, जबकि जमीनी स्तर पर कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य तंत्र की होगी।
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