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फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी करना पड़ा भारी, सऊदी अरब में श्रीलंकाई नागरिक को मौत की सजा

धार्मिक बहस के दौरान की गई टिप्पणी के बाद अपीलीय अदालत ने सुनाई सजा; मानवाधिकार संगठनों ने क्रूर 'निंदा कानूनों' (Blasphemy Laws) को तुरंत खत्म करने की उठाई मांग।

 

भदैनी मिरर इंटरनेशनल डेस्क: सोशल मीडिया पर की गई एक मामूली टिप्पणी किसी की जिंदगी के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, इसका एक दर्दनाक मामला सामने आया है। सऊदी अरब में एक फेसबुक पोस्ट पर धार्मिक बहस के दौरान की गई टिप्पणी के मामले में 24 वर्षीय श्रीलंकाई प्रवासी मजदूर अनोसन शिवरासा (Anojan Sivarasa) को मौत की सजा (Death Penalty) सुनाई गई है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और दुनिया भर से ऐसे 'बर्बर' निंदा कानूनों (Blasphemy Laws) को समाप्त करने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

अनोसन शिवरासा सऊदी अरब में काम कर रहे थे, इसी दौरान फेसबुक पर एक धार्मिक बहस छिड़ गई। बहस के दौरान जब एक अन्य यूजर ने एक हिंदू देवता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की, तो उसके जवाब में अनोसन ने पैगंबर मोहम्मद के संबंध में एक टिप्पणी कर दी थी।

हालाँकि, स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत वह कमेंट डिलीट कर दिया और माफी भी मांग ली। लेकिन किसी ने उस कमेंट का स्क्रीनशॉट लेकर उनके नियोक्ता (Employer) और सऊदी अधिकारियों को भेज दिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

  • सजा में बढ़ोतरी: शुरुआत में एक अदालत ने अनोसन को 5 साल की जेल और भारी जुर्माने की सजा सुनाई थी। लेकिन इसके बाद अभियोजकों (Prosecutors) ने फैसले के खिलाफ अपील की, जिसके बाद अपीलीय अदालत ने उनकी सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड (Death Penalty) में बदल दिया।

  • परेशान परिवार: मिली जानकारी के अनुसार, 26 सितंबर के बाद से उनके परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों की तरफ से अभी तक किसी भी प्रकार की फांसी की तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

'निंदा कानूनों' (Blasphemy Laws) के खिलाफ उठ रही आवाजें

मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमैनिस्ट्स यूके' (Humanists UK) और अन्य वैश्विक संगठनों ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को अपने धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता का अधिकार है—जिसमें धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाना, आलोचना करना या उन्हें बदलना भी शामिल है।

निंदा कानून इस मौलिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन करते हैं। ऐसे कानून धार्मिक विचारों को आलोचना से पूरी तरह सुरक्षित कर देते हैं और लोगों को केवल अपनी राय व्यक्त करने के लिए जेल में डालने या मौत के घाट उतारने की अनुमति देते हैं।

ब्रिटेन सरकार से हस्तक्षेप की मांग

मानवाधिकार संगठनों ने यूके सरकार से आग्रह किया है कि वह फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (FCDO) के माध्यम से इस मामले में तुरंत कूटनीतिक कदम उठाए। संगठन ब्रिटेन के विदेश सचिव से अपील कर रहे हैं कि वे सऊदी अधिकारियों पर दबाव बनाएं ताकि अनोसन शिवरासा की मौत की सजा को पलटा जा सके और वैश्विक स्तर पर ऐसे क्रूर कानूनों को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।