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2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर MDR का बोझ उठाएंगे दुकानदार, ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा कोई शुल्क

15 अक्टूबर 2026 से लागू हो सकता है नियम; एमडीआर पर 18 फीसदी जीएसटी को लेकर 7 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में होगा फैसला।

 

नई दिल्ली/वाराणसी (भदैनी मिरर): देश में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चल रही तमाम अटकलों और चिंताओं पर विराम लगाते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा बयान दिया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर का भुगतान केवल दुकानदार (मर्चेंट) करेंगे, ग्राहकों से इसका एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा।

समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि एमडीआर कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है और इसका पैसा सरकार के खाते में नहीं जाता है।

ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा:

"मुझे नहीं लगता कि ग्राहकों को परेशान या चिंतित होने की कोई आवश्यकता है, क्योंकि हमने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। जिस तरह से क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर लगने वाला एमडीआर व्यापारी खुद वहन करते हैं, ठीक उसी तरह यूपीआई के मामले में भी एमडीआर का चार्ज मर्चेंट ही देंगे।"

क्या है UPI MDR का नया फ्रेमवर्क?

प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार:

  • 15 अक्टूबर 2026 से लागू: पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी किसी दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.40 प्रतिशत का एमडीआर लागू करने का प्रस्ताव है।

  • अधिकतम सीमा (Cap): सरकार ने राहत देते हुए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय कर दी है। यानी ट्रांजैक्शन कितना भी बड़ा क्यों न हो, एमडीआर 300 रुपये से अधिक नहीं होगा।

  • P2P पूरी तरह फ्री: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (Person-to-Person) के बैंक खाते में किए जाने वाले साधारण यूपीआई ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, यह पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।

7 अक्टूबर को GST काउंसिल की बैठक में होगी चर्चा

2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट से लिए जाने वाले एमडीआर के ऊपर 18 प्रतिशत जीएसटी (GST) लगाया जाए या नहीं, इस पर अंतिम फैसला 7 अक्टूबर को प्रस्तावित जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिया जाएगा।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद (जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं) ग्राहकों और व्यापारियों के व्यापक हित में इस पर विचार करेगी। कर विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापारी एमडीआर पर चुकाए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकेंगे, जिससे कारोबारियों पर पड़ने वाला कुल कर का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।