Rupee vs Dollar: ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले ₹92 पर पहुंचा रुपया, जानिए कमजोर होने की बड़ी वजहें
डॉलर की मजबूती, वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव, आरबीआई के हस्तक्षेप पर टिकी निगाहें
नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को बड़ा झटका देखने को मिला। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.00 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का ऑल-टाइम लो है। शुरुआती कारोबार में ही रुपये पर दबाव साफ नजर आया, जिसका मुख्य कारण डॉलर की बढ़ती मांग और वैश्विक बाजारों में सतर्क माहौल बताया जा रहा है।
इंटरबैंक बाजार में क्या रहा हाल
इंटरबैंक फॉरेक्स बाजार में रुपया 91.95 पर खुला और फिसलकर 92.00 तक पहुंच गया। यह अपने पिछले बंद स्तर से 1 पैसा कमजोर रहा।
बुधवार को रुपया 31 पैसे टूटकर 91.99 पर बंद हुआ था, जो उसका अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर था। इससे पहले 23 जनवरी को भी रुपये ने इंट्रा-डे कारोबार में 92.00 का स्तर छुआ था।
रुपये में गिरावट की मुख्य वजहें
- डॉलर की मजबूती
वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। एशियाई मुद्राओं में कमजोरी का सीधा असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा है।
- फेड के फैसले का असर
फॉरेक्स विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को तटस्थ रखने के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई, जिससे रुपये की गिरावट तेज हुई।
- भू-राजनीतिक तनाव
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के चलते निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दिख रहा है।
- इस साल कितना कमजोर हुआ रुपया?
साल 2026 में अब तक रुपया करीब 2% कमजोर हो चुका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद रुपये में लगभग 5% तक गिरावट आ चुकी है।
- विशेषज्ञों की राय
CR Forex Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी के मुताबिक, “लगातार पूंजी निकासी के चलते डॉलर की मांग बनी हुई है, जिससे रुपये पर दबाव कायम है।” उन्होंने बताया कि इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 4% से अधिक की तेजी आई है, जो लगातार तीसरे सत्र में दर्ज की गई।
अमेरिका द्वारा ईरान को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रुपये को और कमजोर करती है।
- डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल का हाल
डॉलर इंडेक्स 0.29% गिरकर 96.16 पर कारोबार कर रहा था।
ब्रेंट क्रूड 1.32% की तेजी के साथ 69.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
- क्या आरबीआई संभालेगा मोर्चा?
फॉरेक्स बाजार के जानकारों के मुताबिक, NDF बाजार में USD/INR का 92.00 का स्तर अहम तकनीकी स्तर है।
यदि यह स्तर टूटता है, तो रुपया 92.20 से 92.50 तक फिसल सकता है।
हालांकि, आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप और डॉलर में नरमी से रुपये को 91.00–91.20 के स्तर तक सहारा मिल सकता है।
शेयर बाजार में भी कमजोरी
घरेलू शेयर बाजार में भी दबाव देखने को मिला—
- बीएसई सेंसेक्स 343.67 अंक गिरकर 82,001.01 पर
- निफ्टी 94.2 अंक टूटकर 25,248.55 पर कारोबार करता दिखा
हालांकि, FII ने 480.26 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिसे बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
औद्योगिक उत्पादन से राहत की खबर
आर्थिक मोर्चे पर राहत की खबर यह रही कि दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन 7.8% बढ़ा, जो दो वर्षों से अधिक का उच्चतम स्तर है।
यह वृद्धि विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण दर्ज की गई। दिसंबर 2024 में यह वृद्धि दर 3.7% थी।