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राजस्थान: 13 साल तक सर्जरी का इंतज़ार और अंत में मौत; दिल्ली एम्स पर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, जांच कमेटी गठित

दिल में छेद से जूझ रही बच्ची की एम्स दिल्ली में मौत; पिता का आरोप— 13 साल तक मिलती रहीं तारीखें, एम्स ने जांच के लिए बनाई हाई-लेवल कमेटी

 

भदैनी मिरर (हेल्थ एवं नेशनल डेस्क)

"दिन, महीने, साल बीतते गए लेकिन मेरी बच्ची का ऑपरेशन नहीं हो पाया... और अंततः 31 अगस्त की देर रात उसने मेरे सामने दम तोड़ दिया।" यह दर्दनाक आपबीती राजस्थान के कोटा (गुमानपुरा) के रहने वाले मुकेश कुमार परियानी की है, जिनकी 15 वर्षीय बेटी तन्वी की दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मौत हो गई।

तन्वी के दिल में जन्मजात छेद (VSD) की समस्या थी। परिजनों का गंभीर आरोप है कि एम्स प्रशासन ने साल 2012 से लेकर 2026 तक यानी 13 सालों में उनकी बेटी की सर्जरी नहीं की और उन्हें सिर्फ 'तारीख पर तारीख' दी जाती रही, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्ची की जान चली गई।

पैसे जमा कराने के बाद भी टलती रही सर्जरी: पिता का आरोप

तन्वी के पिता मुकेश कुमार एक कपड़े की दुकान में सेल्समैन हैं। उन्होंने बताया कि जब तन्वी दो साल की थीं, तब कोटा में 15 अगस्त 2012 को हुई जांच में उसके दिल में छेद होने का पता चला था। इसके बाद स्थानीय डॉक्टरों की सलाह पर वे उसे एम्स, दिल्ली ले आए।

परिजनों के मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

  • रकम जमा कराई, फिर भी टली सर्जरी: मुकेश के अनुसार, साल 2014 में सर्जरी के नाम पर एम्स में सवा लाख रुपये जमा कराए गए और जांच प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन ऐन वक्त पर ऑपरेशन टाल दिया गया।

  • तारीखों का सिलसिला: इसके बाद सितंबर 2015 और फिर दिसंबर 2015 में भर्ती करने के बाद भी ऑपरेशन टाल दिया गया। यह सिलसिला वर्षों तक चलता रहा।

  • निजी अस्पताल और शिकायतें: साल 2013 में दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने भारी खर्च और तीन ऑपरेशनों की बात कही थी, इसलिए परिवार एम्स के भरोसे ही रहा। परिजनों ने 2016 में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भी शिकायत भेजी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।

एम्स दिल्ली का पक्ष: "सर्जरी संभव ही नहीं थी"

मामला मीडिया में आने के बाद एम्स दिल्ली ने आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा और आरोपों को खारिज किया है:

  • मेडिकल कारण: एम्स के अनुसार, तन्वी को दिल में छेद (VSD) के साथ 'पलमोनरी एट्रिशिया' (Pulmonary Atresia) की जटिल समस्या थी। 2013 से 2017 के बीच की गई कई गहन जांचों (सीटी एंजियोग्राफी, कार्डियक कैथीटेराइजेशन) के बाद यह निष्कर्ष निकला था कि दिल की जटिल बनावट के कारण सुधारात्मक सर्जरी संभव नहीं थी।

  • मेडिकल मैनेजमेंट की सलाह: एम्स ने परिजनों को नियमित फॉलोअप और दवाओं से इलाज (मेडिकल मैनेजमेंट) की सलाह दी थी। पिछले साल भी विभाग के प्रमुख ने यही सलाह दोहराई थी।

  • मौत की वजह: एम्स के मुताबिक, 24 अगस्त को तन्वी को स्थिति बिगड़ने पर भर्ती कराया गया था, जहां हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना का आकलन किया जा रहा था। 31 अगस्त की रात अचानक 'हाइपोक्सिक स्पेल' (शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटकर 48% होना) के कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ, जिससे उसकी मौत हो गई।

एम्स ने गठित की हाई-लेवल जांच कमेटी

एम्स प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति (High-Level Committee) का गठन कर दिया है। यह कमेटी तन्वी के पूरे मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज की टाइमलाइन और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की गहन समीक्षा करेगी।

वहीं दूसरी ओर, अपनी बेटी को खो चुके माता-पिता सदमे में हैं और उन्होंने एम्स प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज कराने का फैसला लिया है।