ईरानी युद्धपोत डूबने पर भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा, Pakistan की साजिश का खुलासा
सोशल मीडिया पर फैलाया गया फर्जी नैरेटिव, ISI से जुड़े नेटवर्क ने भारत पर लगाया आरोप; जांच में सामने आई सच्चाई
नई दिल्ली। श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत के डूबने के बाद भारत को बदनाम करने की साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि Pakistan से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क ने इस पूरे मामले में भारत के खिलाफ फर्जी नैरेटिव तैयार कर उसे वायरल करने की कोशिश की।
क्या है पूरा मामला?
4 मार्च को श्रीलंका के पास अमेरिकी हमले में ईरान का युद्धपोत IRIS Dena डूब गया था। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि भारत ने अमेरिका को संवेदनशील जानकारी दी थी, जिसके आधार पर यह हमला किया गया।
हालांकि, जांच में यह दावा पूरी तरह फर्जी निकला।
सोशल मीडिया पर फैलाया गया झूठ
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) विश्लेषण में सामने आया कि इस अफवाह को फैलाने के लिए सैकड़ों फर्जी और संदिग्ध अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया।
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करीब 100 अकाउंट्स से 500 से ज्यादा पोस्ट
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लगभग 40% अकाउंट पाकिस्तान से जुड़े
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15% प्रो-ईरान, 12% प्रो-फिलिस्तीन और 8% एंटी-वॉर समूह
बताया गया कि घटना के 3 से 6 घंटे के भीतर ही यह प्रोपेगैंडा अभियान शुरू हो गया था, जिससे इसे तेजी से वायरल किया जा सके।
AI वीडियो और फेक कंटेंट का इस्तेमाल
एनालिस्ट्स के अनुसार, इस अभियान में AI-जनित वीडियो और एडिटेड तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके और भारत के खिलाफ माहौल बनाया जा सके।
श्रीलंका का क्या है रुख?
Sri Lanka के राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake ने संसद में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मत्ताला एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति नहीं दी थी।
यह बयान भी इस बात की पुष्टि करता है कि भारत की भूमिका को लेकर फैलाया गया नैरेटिव निराधार था।
हमले में क्या हुआ था?
अमेरिका ने श्रीलंका के गाले तट के पास इस जहाज को निशाना बनाया था।
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84 नाविकों की मौत
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32 को बचाया गया
यह पोत भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लौट रहा था।
बड़ा साइबर प्रोपेगैंडा नेटवर्क
जांच में यह साफ हुआ है कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित साइबर प्रोपेगैंडा का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना था।