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PM Modi in Norway: 'अब एक-एक कदम से बात नहीं बनेगी...' भारत-नॉर्वे बिजनेस समिट में पीएम मोदी ने दिया ऊंचे लक्ष्यों का मंत्र, निवेशकों को दी अपनी 'गारंटी'

दोनों देशों के बीच संबंधों को 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' में किया गया एलिवेट; 50 से अधिक दिग्गज कंपनियों के CEOs रहे मौजूद

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नॉर्वे दौरे के दौरान ओस्लो में आयोजित 'भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन' (Norway-India Business and Research Summit) को संबोधित किया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ साझा तौर पर संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक, अनुसंधान और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक नया रोडमैप पेश किया। इस हाई-लेवल समिट में भारत और नॉर्वे की 50 से अधिक प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) ने हिस्सा लिया।

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "यह केवल संभावनाओं की नहीं, बल्कि एक साबित हो चुकी (Proven) पार्टनरशिप है। अब हमें एक-एक कदम से चलने के बजाय अपनी गति को बढ़ाना होगा और लक्ष्य भी बहुत ऊंचे तय करने होंगे।"

TEPA समझौता बदलेगा तस्वीर: 100 बिलियन डॉलर निवेश का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2025 में यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के साथ लागू हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) का विशेष रूप से उल्लेख किया।

  • पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता टैलेंट, टेक्नोलॉजी और म्यूचुअल ट्रस्ट पर आधारित है।

  • इस समझौते के माध्यम से अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश लाने और 1 मिलियन (10 लाख) रोजगार पैदा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

  • उन्होंने वैश्विक व्यापार जगत को भरोसा देते हुए कहा, "भारत में आपके निवेश को परिणामों (Outcomes) में बदलना, हमारी गारंटी है।"

क्लीन एनर्जी और शिपबिल्डिंग में बड़े अवसर

प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की कंपनियों के लिए भारत के दो सबसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया:

  1. ग्रीन और क्लीन एनर्जी: पीएम मोदी ने बताया कि भारत ने साल 2030 तक 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उन्होंने नॉर्वे वेल्थ फंड को भारत के क्लीन एनर्जी फ्यूचर में अहम हिस्सेदार बनने का आमंत्रण दिया।

  2. शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण): पीएम मोदी ने कहा, "आज नॉर्वे के करीब 10 फीसदी जहाज भारत में बनते हैं। हमारा लक्ष्य अगले 5 वर्षों में इसे बढ़ाकर 25 फीसदी तक ले जाने का है।" उन्होंने बताया कि भारत को समुद्री सेवाओं, ग्रीन शिपिंग और मरम्मत (MRO) का वैश्विक हब बनाया जा रहा है।

'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' से बदला देश का इकोनॉमिक DNA

वैश्विक मंच से भारत के मजबूत विनियामक ढांचे की वकालत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत का इकोनॉमिक DNA पूरी तरह बदल चुका है। सरकार कंप्लायंस को लगातार कम कर रही है और 'इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को बढ़ाने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठा रही है। टैक्सेशन, लेबर कोड और गवर्नेंस में किए गए नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स का ही नतीजा है कि भारत आज दुनिया का सबसे पसंदीदा इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन गया है।

नवाचार के लिए मजबूत कदम: दोनों देशों के संबंधों को अब 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। इससे नॉर्वे की कंपनियों को भारत में क्रिटिकल मिनरल्स, एआई (AI), साइबर, स्पेस और डिफेंस जैसे कोर सेक्टर्स में पूरा समर्थन मिलेगा। इसके अलावा दोनों देशों के रिसर्च इकोसिस्टम और स्टार्टअप्स को जोड़ने के लिए 'लैब-टू-लैब' और 'यूनिवर्सिटी-टू-यूनीवर्सिटी' सहयोग भी बढ़ाया जा रहा है।

इन्वेस्ट इंडिया में खुली 'डेडिकेटेड ट्रेड फैसिलिटेशन डेस्क' 

नॉर्वे के निवेशकों की राह आसान करने के लिए प्रधानमंत्री ने एक और बड़ा एलान किया। उन्होंने बताया कि भारत के 'इन्वेस्ट इंडिया' मंच के तहत नॉर्वे के लिए एक विशिष्ट ट्रेड फैसिलिटेशन डेस्क (Dedicated Trade Facilitation Desk) खोली गई है। यह सिंगल-विंडो व्यवस्था नॉर्वे की कंपनियों की निवेश यात्रा को सुगम, तेज और प्रभावी बनाएगी, जिससे राज्य सरकारों के साथ को-ऑर्डिनेशन और त्वरित निर्णय लेने में अत्यधिक सुविधा होगी।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, टनलिंग टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य सेवा नवाचार सहित कई महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो दोनों देशों के विकास को नई गति देंगे।