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Odisha CEO VRS Case: ज्ञानेश कुमार विवाद के बीच ओडिशा के मुख्य चुनाव अधिकारी R. Santhan Gopalan ने मांगा VRS

SIR प्रक्रिया पूरी होते ही 2001 बैच के IAS अधिकारी का बड़ा फैसला; बीजेडी-कांग्रेस के आरोपों और ईसीआई विवाद के बीच निजी कारणों का दिया हवाला

 

भुवनेश्वर / भदैनी मिरर: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच ओडिशा के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) आर. संथान गोपालन ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन कर राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है।

ओडिशा कैडर के 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी गोपालन ने राज्य में SIR प्रक्रिया पूरी होने और संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित होने के महज एक हफ्ते बाद, 30 सितंबर को अपना वीआरएस आवेदन सौंपा है।

'निजी कारण और स्वास्थ्य की वजह से लिया फैसला'

तमिलनाडु के मूल निवासी और जुलाई 2024 से ओडिशा के सीइओ के पद पर तैनात आर. संथान गोपालन का कार्यकाल जून 2028 तक (लगभग 18 महीने की सेवा शेष) था। विवादों पर सफाई देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इस कदम का राजनीतिक आरोपों या एसआईआर प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है।

गोपालन ने कहा—

"मैंने 2 सितंबर को सरकारी सेवा के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। मैं निजी कारणों और परिवार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए वीआरएस ले रहा हूं। मैंने पहले ही तय किया था कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही यह कदम उठाऊंगा।"

ओडिशा SIR में 17 लाख नाम हटने पर गरमाई थी सियासत

21 सितंबर को प्रकाशित ओडिशा की 3.16 करोड़ मतदाताओं वाली सूची के बाद विपक्षी दलों— बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया था। बीजेडी का आरोप था कि एसआईआर के दौरान 27.50 लाख से अधिक पात्र मतदाताओं को बाहर कर दिया गया और 17 लाख से अधिक नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाए गए। बीजेडी ने चुनाव अधिकारी पर आंकड़ों में हेरफेर का सीधा आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी।

ECI में आंतरिक असंतोष और ओडिशा में अफसरों के VRS का सिलसिला

गोपालन का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आई हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्तों के बीच फॉर्म-6 में बदलाव, कामकाज के केंद्रीकरण और अन्य राज्यों में वोटर हटाने की अपीलों को लेकर मतभेद उभरे थे।

वहीं, ओडिशा में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों द्वारा वीआरएस/इस्तीफा देने का चलन बढ़ा है:

  • पूर्व आईएएस वी.के. पांडियन ने अक्टूबर 2023 में वीआरएस लेकर बीजेडी का दामन थामा था।

  • उनकी पत्नी व पूर्व आईएएस सुजाता कार्तिकेयन ने मार्च 2025 में इस्तीफा देकर राजनीति जॉइन की।

  • हाल ही में भुवनेश्वर डीसीपी व आईपीएस जगमोहन मीणा और प्रोबेशनर आईपीएस सीए रामदास ने भी अपने पदों से त्यागपत्र दिया था।