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"कोर्ट के लिए कोई VIP नहीं": राहुल गांधी मानहानि केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

CJI सूर्यकांत की पीठ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट के लिए कोई VIP नहीं। गलवान टिप्पणी मानहानि मामले में शिकायतकर्ता को दी आवेदन दाखिल करने की सलाह।

 

कानूनी डेस्क, भदैनी मिरर: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले की जल्द सुनवाई की मांग पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के समक्ष सभी मामलों को एक समान दृष्टिकोण से देखा जाता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले को विशेष प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य झड़प को लेकर राहुल गांधी द्वारा दी गई कथित टिप्पणियों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही से संबंधित है। अगस्त 2025 में जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

बुधवार को सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि याचिका काफी समय से लंबित है और इसे अन्य असंबद्ध मामलों के साथ जोड़कर सूचीबद्ध किया जा रहा है।

अदालत में दी गई मुख्य दलीलें:

  • गौरव भाटिया (शिकायतकर्ता के वकील): भाटिया ने तर्क दिया कि मामले में बार-बार तारीखें बढ़ रही हैं और राहुल गांधी निचली अदालत में पेश नहीं हुए। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी VIP नहीं हैं, इसलिए इस मामले को दूसरे केस से अलग करके स्वतंत्र रूप से जल्द सुना जाना चाहिए।"

  • रजिस्ट्री पर सवाल: शिकायतकर्ता के वकील ने यह भी दावा किया कि न्यायिक निर्देश के बावजूद रजिस्ट्री केस को सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं कर रही है, जो संस्थागत प्रक्रिया के लिहाज से उचित नहीं है।

  • CJI सूर्यकांत का रुख: मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमारे सामने सभी मामलों को बराबर माना जाता है। यदि आप जल्द सुनवाई चाहते हैं, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित आवेदन दाखिल करें।"

मामलों को अलग करने की मांग

राहुल गांधी की याचिका को 'द वायर' से जुड़े दो अन्य आपराधिक मानहानि मामलों के साथ टैग किया गया है। सुनवाई के दौरान वकीलों ने कोर्ट को बताया कि अब मुख्य कानूनी प्रश्न 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 223 की व्याख्या से जुड़ा है—यानी क्या किसी आरोपी के खिलाफ कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने से पहले उसे पक्ष रखने का मौका दिया जाना अनिवार्य है?

वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि राहुल गांधी का 2024 का मामला 'द वायर' के मामलों से पूरी तरह भिन्न है, इसलिए इन्हें अलग-अलग सुना जाना चाहिए। फिलहाल शीर्ष अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष को जल्द सुनवाई के लिए औपचारिक आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है।