'न्यायपालिका को कोई धौंस नहीं दिखा सकता': राहुल गांधी की SIR याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, CJI की तीखी टिप्पणी
'हम हाथीदांत की मीनार में नहीं रहते', CJI ने दिया कड़ा संदेश
डिजिटल डेस्क। देश में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 13 प्रमुख विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत परिसर की ओर राजनीतिक प्रदर्शन और बयानबाजी का जिक्र आने पर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए साफ किया कि न्यायपालिका किसी के दबाव में काम नहीं करती।
'हम हाथीदांत की मीनार में नहीं रहते', CJI ने दिया कड़ा संदेश
सुनवाई के समय जब राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं द्वारा एसआईआर की अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च का जिक्र आया, तो CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा- "कोई भी न्यायपालिका को धौंस नहीं दिखा सकता और न ही दबाव में ला सकता है।"
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने राजनीतिक जुलूस और दबाव बनाने के प्रयासों पर आपत्ति जताते हुए अदालत को बताया कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह 'हाथीदांत की मीनार' में बैठकर काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि अदालत को बाहर दिए जा रहे बयानों की पूरी जानकारी है और इस तरह के कमजोर प्रयासों पर न्यायपालिका का कोई ध्यान नहीं जाता।
याचिकाकर्ता के आचरण पर जताई आपत्ति
अदालत ने नोटिस जारी करने के साथ ही 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तारीख पर अदालत उस विशिष्ट याचिकाकर्ता से उसके व्यवहार के संबंध में जवाब-तलब करेगी।
विपक्षी दिग्गजों ने खटखटाया है सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
इस संयुक्त याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत समेत 13 प्रमुख विपक्षी चेहरे शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान असदुद्दीन ओवैसी सहित अन्य नेताओं द्वारा दायर समान याचिकाओं पर भी केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए गए। अदालत ने सभी समान याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
याचिका में क्या हैं मुख्य मांगे?
विपक्षी नेताओं ने याचिका में आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत मनमाने तरीके से पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग के फैसलों की जांच की जाए कि वे संविधान के अनुच्छेद 324 और चुनाव आयोग से जुड़े 2023 के कानूनों के अनुरूप हैं या नहीं।
किसी भी मतदाता का नाम बिना पूर्व सूचना (नोटिस) दिए और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किए बिना न हटाया जाए।
जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनकी बूथ-वार सूची कारण और जनसांख्यिकीय विवरण (Demographic Details) के साथ सार्वजनिक की जाए।