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New CDS of India: जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने देश के नए सीडीएस, चीन-पाकिस्तान मामलों के हैं बड़े एक्सपर्ट

40 साल से ज्यादा का बेदाग सैन्य करियर, चीन-पाक मामलों के विशेषज्ञ

 

नई दिल्ली (भदैनी मिरर डेस्क): भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने रविवार को आधिकारिक तौर पर भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।

जनरल सुब्रमणि ने शनिवार को सेवानिवृत्त हुए पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान की जगह ली है। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने देश के पहले सीडीएस दिवंगत जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान के शानदार नेतृत्व और देश की सुरक्षा में दिए गए योगदान के प्रति आभार जताया।

सीडीएस की प्राथमिकता: पीएम मोदी का 'JAI' विजन और स्वदेशी हथियार

पद संभालने के बाद देश के नए सीडीएस जनरल सुब्रमणि ने अपनी प्राथमिकताओं को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य फोकस सशस्त्र बलों के संगठनात्मक सुधारों और महत्वाकांक्षी 'मिलिट्री थियेटराइजेशन' (Military Theaterisation) योजना को तेजी से लागू करने पर रहेगा।

सीडीएस के विजन के मुख्य बिंदु:

  • 'JAI' विजन पर काम: वह प्रधानमंत्री के विजन JAI यानी Jointness (जॉइंटनेस - तीनों सेनाओं में तालमेल), Aatmanirbharta (आत्मनिर्भरता) और Innovation (नवाचार) को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करेंगे।

  • स्वदेशीकरण को बढ़ावा: उन्होंने साफ किया कि 'आत्मनिर्भरता' ही राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य आधार है। वह सेना में स्वदेशी हथियारों के विकास और उन्हें जल्द से जल्द शामिल करने के काम में तेजी लाएंगे।इसके लिए सेना, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और रिसर्च सेक्टर के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा।

  • जवानों और वीर नारियों का कल्याण: तीनों सेनाओं के जवानों की ट्रेनिंग, उनके वेलफेयर, पूर्व सैनिकों और 'वीर नारियों' के कल्याण के लिए काम करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहेगा।

सीडीएस का संदेश: "देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हमारे सशस्त्र बल हमेशा की तरह साहस और सम्मान के साथ समर्पित रहेंगे। हमारे शहीदों का बलिदान ही हमारी प्रेरणा है।"

40 साल से ज्यादा का बेदाग सैन्य करियर, चीन-पाक मामलों के विशेषज्ञ

जनरल एनएस राजा सुब्रमणि का सैन्य करियर 40 वर्षों से भी अधिक लंबा और बेहद शानदार रहा है। उन्हें रणनीतिक रूप से चीन और पाकिस्तान की सीमाओं और मामलों का गहरा विशेषज्ञ माना जाता है।

करियर और उपलब्धियों पर एक नज़र:

  • कमीशन: 14 दिसंबर 1985 को उन्हें गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन मिला था। वह एनडीए (NDA) और आईएमए (IMA) के पूर्व छात्र रहे हैं।

  • महत्वपूर्ण पद: वह 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थल सेना के उप प्रमुख रहे। इससे पहले वह मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। सीडीएस बनने से पहले वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के रूप में देश को सेवाएं दे रहे थे।

  • कमांड का अनुभव: उन्होंने असम में 'ऑपरेशन राइनो' के तहत 16 गढ़वाल राइफल्स, जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और 17 माउंटेन डिवीजन का सफल नेतृत्व किया है। इसके अलावा वह पश्चिमी मोर्चे पर सेना की स्ट्राइक कोर सहित दो कोर की कमान संभाल चुके हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय अनुभव: वह कजाकिस्तान में भारत के रक्षा अताशे (Defence Attaché) भी रहे हैं। उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से एमए और मद्रास विश्वविद्यालय से एम.फिल की डिग्री है।

सैन्य सम्मान: उनकी असाधारण और गौरवमयी देश सेवा के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है।