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साल 2026 के आखिरी तीन महीने समंदर के लिए चिंताजनक: इसरो की चेतावनी, बन सकते हैं 3 ताकतवर चक्रवाती तूफान

अक्टूबर से दिसंबर के बीच उत्तर हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बढ़ेगी चक्रवाती गतिविधि; तटीय राज्यों के लिए जारी हुआ अलर्ट।

 

नई दिल्ली

 वर्ष 2026 के आखिरी तीन महीने (अक्टूबर से दिसंबर) उत्तर हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के तटीय इलाकों के लिए बेहद सतर्क रहने वाले साबित हो सकते हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के उपग्रह आधारित विश्लेषणों और आंकड़ों के अनुसार, इस पोस्ट-मॉनसून सीजन में उत्तर हिंद महासागर में तीन शक्तिशाली ट्रॉपिकल साइक्लोन (उष्णकटिबंधीय चक्रवात) आकार ले सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि तूफानों की कुल ताकत यानी पावर डिसिपेशन इंडेक्स (PDI) के लिहाज से यह बीते 44 सालों की सबसे गंभीर स्थितियों में से एक हो सकती है।

अक्टूबर से दिसंबर के बीच क्यों बढ़ता है साइक्लोन का खतरा?

वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात बनने के दो प्रमुख सीजन होते हैं—पहला अप्रैल से जून और दूसरा अक्टूबर से दिसंबर। मॉनसून की वापसी के बाद अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में समुद्री सतह का तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियां चक्रवात के अनुकूल हो जाती हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक 1996 से 2025 के बीच इस क्षेत्र में 266 चक्रवाती प्रणालियां दर्ज की गईं, यानी औसतन हर साल करीब चार चक्रवात बनते हैं।

पूर्वी और पश्चिमी तटीय राज्यों पर असर की आशंका वैज्ञानिक रिपोर्टों के मुताबिक:

  • बंगाल की खाड़ी: यहां बनने वाले चक्रवात मुख्य रूप से ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे पूर्वी तटीय राज्यों को प्रभावित कर सकते हैं।

  • अरब सागर: यहां विकसित होने वाली मजबूत चक्रवाती प्रणालियां महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिमी तट के इलाकों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।

क्या होता है Power Dissipation Index (PDI)?

तूफान की तबाही मचाने की क्षमता को मापने के लिए वैज्ञानिक Power Dissipation Index (PDI) का उपयोग करते हैं। PDI केवल तूफानों की संख्या नहीं गिनता, बल्कि उनकी हवा की गति, तीव्रता और वे कितने लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं, इसका सटीक आकलन करता है। यदि कम संख्या में भी तूफान बनते हैं और उनकी PDI रेटिंग ज्यादा होती है, तो वे तटीय इलाकों में भारी तबाही मचा सकते हैं।

तटीय क्षेत्रों में अलर्ट, IMD की चेतावनियों पर रखें नजर

चक्रवात की स्थिति में तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें और तटीय इलाकों में जलभराव का खतरा रहता है। प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में न जाने और तटीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। हालांकि, किसी भी चक्रवात का सटीक रास्ता और तीव्रता उसके बनने के समय ही पूरी तरह स्पष्ट होती है, इसलिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और इसरो की आधिकारिक अपडेट्स पर नजर रखना बेहद जरूरी है।