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न्याय में देरी अपने आप में खुद ही अन्याय, न्यायिक सुधारों की जरूरत-शंकराचार्य सदानंद सरस्वती

धर्मांतरण के लिए सरकारी नीतियों में भ्रष्टाचार जिम्मेदार, प्रलोभन में आकर लोग कर रहे धर्मांतरण

 

धर्मांतरित लोगों का नाम सरकारी दस्तावेजों से हटाया जाना चाहिए

नई दिल्ली। जगद्गुरु शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने धर्मांतरण, राजनीति और न्याय व्यवस्था पर कहा कि प्रलोभन के कारण लोग धर्म बदलते हैं। इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। उन्होंने धर्मांतरित लोगों का नाम सरकारी दस्तावेजों से हटाने की मांग की। न्याय में देरी को अन्याय बताते हुए न्यायिक सुधारों और अनावश्यक कानूनों को हटाने की बात कही।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित एक प्रखंड मनोहरपुर में द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने रविवार को विश्व कल्याण आश्रम (पारलीपोस) में पत्रकारों से वार्ता की। इस दौरान धर्मांतरण, राजनीति और न्याय व्यवस्था पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। कहा कि जिन्हें अपनी परंपरा और धर्म का ज्ञान नहीं होता, वही लोग प्रलोभन में आकर धर्म परिवर्तन करते हैं। सुविधा और प्रलोभन की वजह से लोग मिशनरियों के चंगुल में फंस रहे हैं। इसके लिए उन्होंने सरकारी नीतियों में व्याप्त भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया। शंकराचार्य ने कहाकि धर्म परिवर्तन करने वालों का नाम आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों से तुरंत हटाया जाना चाहिए। कहाकि जब आप अपने पूर्वजों और माता-पिता को नहीं बदल सकते, तो धर्म को कैसे बदल सकते हैं? मुगल और अंग्रेज भी सनातन को खत्म नहीं कर सके, हम धर्मांतरण रोकने में अवश्य सफल होंगे।

शंकराचार्य ने देश की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में न्याय मिलने में अत्यधिक विलंब होता है, यह स्वयं में एक अन्याय है। संविधान में संशोधन कर न्यायिक व्यवस्था बदलनी होगी। जजों की भारी संख्या में नियुक्ति हो और अनावश्यक कानूनों को हटाया जाय। देश के संविधान से हिंदू कोड बिल भी हटना चाहिए। शंकराचार्य ने धर्म और शासक के अंतर्संबंधों पर कहा कि देश के राजा को अनिवार्य रूप से धार्मिक होना चाहिए। यदि राजा धार्मिक होगा, तो प्रजा भी धर्म का मार्ग अपनाएगी। राजा को हमेशा लोक भावना का आदर करते हुए ही कानूनों का निर्माण करना चाहिए। सनातन और हिंदू की व्याख्या करते हुए कहा कि दोनों एक ही हैं। ईसाई और मुस्लिम धर्मों की आयु सीमित है, जबकि सनातन धर्म शाश्वत और अनादि है।