पत्रकार अभिषेक उपाध्याय मामला: सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस के X (ट्विटर) नोटिस को किया रद्द
'रोड रेज केस में 3 महीने पुराना डेटा मांगना Overkill': सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया गाजियाबाद पुलिस का X (ट्विटर) नोटिस, पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को मिली राहत
नई दिल्ली (भदैनी मिरर डेस्क): सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय से जुड़े एक कथित रोड रेज मामले में गाजियाबाद पुलिस को बड़ा झटका दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) को भेजे गए गाजियाबाद पुलिस के नोटिस को रद्द कर दिया। पुलिस ने इस नोटिस के जरिए पत्रकार का घटना से करीब 3 महीने पुराना पर्सनल और डिजिटल डेटा मांगा था, जिसे शीर्ष अदालत ने 'Overkill' (अत्यधिक/अनावश्यक) करार दिया।
अदालत ने इसके साथ ही स्पष्ट किया कि यदि पुलिस को नोटिस के आधार पर कोई भी डिजिटल डेटा हासिल हुआ है, तो उसका इस्तेमाल अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ जांच में नहीं किया जा सकेगा।
'3 महीने पुराना व्यक्तिगत डेटा मांगना गलत': सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जोयमाल्या बागची ने मौखिक टिप्पणी में कहा, "घटना की तारीख से 3 महीने पहले का पर्सनल या डिजिटल डेटा मांगना अत्यधिक (Overkill) प्रतीत होता है। FIR दर्ज होने के बाद भी, व्यक्तिगत जानकारी तब तक नहीं मांगी जा सकती जब तक कि आरोपी को खोजने या गिरफ्तार करने के अन्य वैकल्पिक उपाय अपर्याप्त न साबित हों।"
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर दावा किया था कि 'X' को नोटिस केवल पत्रकार को ट्रेस करने और गिरफ्तार करने के मकसद से भेजा गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस कमिश्नर का यह स्पष्टीकरण नोटिस में मांगी गई जानकारी (जैसे- लॉगिन/लॉगआउट IP एड्रेस, ईमेल आईडी, IMEI नंबर और रजिस्ट्रेशन लॉग) से मेल नहीं खाता है।
राम मंदिर रिपोर्टिंग से जुड़ा है विवाद का तार?
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान के कथित गबन पर उनके द्वारा की गई इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग (चैनल 'टॉप सीक्रेट') के प्रतिशोध में यह फर्जी रोड रेज केस दर्ज कराया गया था।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, उन पर शिप्रा मॉल के पास एक बाइक सवार को टक्कर मारने, धमकी देने और जातिसूचक शब्द कहने का आरोप है। अभिषेक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे प्रायोजित बताया था और सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 5 बड़ी बातें
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'Absolute Protection' बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक उपाध्याय को गिरफ्तारी और किसी भी तरह की दंडात्मक (Coercive) कार्रवाई से दी गई अंतरिम राहत को पूरी तरह बरकरार रखा है।
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जब्त कार वापस करने का निर्देश: पुलिस द्वारा उनके घर से जब्त की गई कार को 2 दिनों के भीतर तुरंत लौटाने का आदेश दिया गया है।
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डिजिटल डेटा के इस्तेमाल पर रोक: नोटिस या किसी अन्य माध्यम से हासिल की गई पत्रकार की निजी जानकारी को उनके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
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डिजिटल डेटा गाइडलाइंस की आजादी: जांच एजेंसियों द्वारा डिजिटल डेटा जुटाने के नियमों/गाइडलाइंस के लिए अलग से जनहित याचिका दाखिल करने की छूट दी गई है।
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हाईकोर्ट जाने की छूट: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्रकार चाहें तो FIR को रद्द कराने के लिए सक्षम हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने कोर्ट के फैसले पर जताई खुशी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि अदालत ने गाजियाबाद पुलिस के नोटिस को रद्द कर उन्हें 'Absolute Protection' प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके खुलासे 'टॉप सीक्रेट' और राम मंदिर रिपोर्टिंग का संज्ञान लेते हुए 3 महीने पुराना डेटा मांगने को 'Overkill' माना और पुलिस को 2 दिन में कार वापस करने का सख्त निर्देश दिया है।