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JPSC विवाद में झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 11वीं-13वीं परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर लगाई रोक

चयनित अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट का फैसला; भारी छात्र आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने रद्द की थीं 45 परीक्षाएं

 

रांची 

झारखंड में जारी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा और इसके तहत होने वाली नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब राजधानी रांची में सीजीएल (CGL) समेत अन्य परीक्षाओं को रद्द किए जाने के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है।

सरकार के फैसले के खिलाफ दायर हुई थीं रिट याचिकाएं

झारखंड सरकार द्वारा 11वीं-13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने के निर्णय के खिलाफ बुधवार को चयनित अभ्यर्थियों की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में दो अलग-अलग रिट याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ भी एक अलग याचिका दायर की गई थी। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रद्द करने के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी।

"रात के अंधेरे में नोटिस मिला, हम टूट चुके थे"

मामले में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए जेएएस (JAS) अधिकारी सूर्य प्रकाश कुजूर ने कहा:

"हमें सरकार की ओर से देर रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच परीक्षा रद्द होने का नोटिस मिला था। जैसे ही हमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द होने की जानकारी मिली, हम पूरी तरह टूट गए थे। हमने कभी नहीं सोचा था कि कड़ी मेहनत से सफलता पाने के बाद हमारे साथ ऐसा कुछ होगा।"

छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार ने रद्द की थीं 45 परीक्षाएं

उल्लेखनीय है कि झारखंड में परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर छात्रों का भारी आंदोलन देखने को मिला था। चौतरफा दबाव के चलते राज्य सरकार को 11वीं-13वीं जेपीएससी सहित कुल 45 परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द या स्थगित करनी पड़ी थीं।

हालांकि, बिना किसी ठोस जांच के पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द किए जाने से कड़ी मेहनत से सफल हुए अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए और अदालत का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट द्वारा सरकार के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सरकार के अगले रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।