Income Tax: बैंक से निकाले 15 लाख फिर खाते में किए जमा, इनकम टैक्स ने ठोक दिया टैक्स; अब ITAT के फैसले ने पलटी बाजी
नोटबंदी का मामला: घर में रखी अपनी ही नकदी जमा करने पर मिला था नोटिस, ट्रिब्यूनल ने करदाता को दी बड़ी राहत।
नई दिल्ली/वाराणसी: इनकम टैक्स विभाग और टैक्सपेयर्स के बीच अक्सर 'तर्क बनाम सबूत' की जंग देखने को मिलती है। हाल ही में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो उन लोगों के लिए संजीवनी साबित होगा जिन्होंने नोटबंदी के दौरान अपने ही बैंक खाते से निकली हुई रकम को दोबारा जमा किया था।
क्या था मामला?
यह मामला 'आईटीओ बनाम श्रीमती पूर्णिमा दास' से जुड़ा है। करदाता महिला ने साल 2016 (नोटबंदी) से काफी पहले अपने बैंक खाते से किस्तों में कुल 15 लाख रुपये निकाले थे। किसी कारणवश वह पैसा खर्च नहीं हुआ और महिला ने उसे घर में ही रखा। जब नोटबंदी हुई, तो महिला ने वही कैश वापस अपने बैंक खाते में जमा करा दिया। आयकर विभाग ने इसे संदिग्ध माना और असेसिंग ऑफिसर (AO) ने इसे 'अघोषित आय' बताते हुए टैक्स ठोक दिया।
टैक्स विभाग की दलील: "कोई समझदार व्यक्ति ऐसा नहीं करता"
असेसिंग ऑफिसर का तर्क था कि कोई भी समझदार व्यक्ति इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक घर में बेकार नहीं रखेगा। अधिकारी का मानना था कि पैसे को निवेश करना चाहिए था या ब्याज कमाना चाहिए था। इसी 'अजीब लगने वाली कहानी' को आधार बनाकर विभाग ने दावा किया कि जमा किया गया पैसा बैंक से निकाला हुआ पुराना पैसा नहीं, बल्कि नई काली कमाई है।
ITAT का ऐतिहासिक फैसला: "धारणा नहीं, सबूत है जरूरी"
ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया:
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सबूत सर्वोपरि: बैंक स्टेटमेंट से यह साबित था कि पैसा पहले निकाला गया था। विभाग के पास यह साबित करने का कोई ठोस सबूत नहीं था कि वह पैसा कहीं और खर्च हो चुका है।
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संदेह बनाम सत्य: कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि न्याय का सिद्धांत कहता है कि संदेह (Suspicion), चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, वह सबूत (Evidence) की जगह नहीं ले सकता।
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व्यवहार का अधिकार: कोई बात अजीब लग सकती है, लेकिन यदि वह कानून सम्मत है और उसका रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।
टैक्सपेयर्स के लिए सबक
इस फैसले ने उन लोगों के लिए राहत का रास्ता खोल दिया है जिन्हें विभाग की 'धारणा' के कारण नोटिस थमा दिए जाते हैं। भदैनी मिरर अपने पाठकों को सलाह देता है कि:
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बैंक से बड़ी नकदी निकालने पर उसकी रसीदें और स्टेटमेंट हमेशा संभाल कर रखें।
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अपनी आय और व्यय का रिकॉर्ड रखें ताकि जरूरत पड़ने पर 'सोर्स ऑफ इनकम' बताया जा सके।
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यह ध्यान रखें कि ITAT के इस फैसले को विभाग उच्च अदालतों में चुनौती दे सकता है, इसलिए वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना ही सबसे बेहतर बचाव है।