उत्तराखंड बॉर्डर पर भारी तनाव: बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़े निहंग सिख, हेमकुंड साहिब की तरफ कूच से पुलिस महकमे में हड़कंप
हिमाचल-उत्तराखंड के कुलहाल बॉर्डर पर पुलिस से भिड़ंत; कर्णप्रयाग विवाद में गिरफ्तार साथियों की रिहाई पर अड़े प्रदर्शनकारी, मोहाली से आए हैं निहंग
भदैनी मिरर : हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुलहाल (विकासनगर) बॉर्डर पर उस समय भारी तनाव और हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब पंजाब से आए निहंग सिखों के एक बड़े समूह ने पुलिस की सुरक्षा घेराबंदी को तोड़ दिया। बहुस्तरीय (मल्टी-लेयर्ड) मेटल बैरिकेड्स को जबरन धकेलते हुए निहंगों का यह जत्था उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ गया है।
इस घटना के बाद से पूरे सीमावर्ती इलाके में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और भारी संख्या में पुलिस बल को दंगा नियंत्रण गियर (Riot Gear) के साथ तैनात किया गया है।
छावनी में तब्दील हुआ कुलहाल बॉर्डर, वार्ता रही बेअसर
दरअसल, कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारों में हाल ही में हुए एक विवाद को लेकर निहंग समूहों ने उत्तराखंड कूच करने का एलान किया था। पंजाब के मोहाली से चले इस जत्थे को रोकने के लिए उत्तराखंड प्रशासन ने कुलहाल चेकपोस्ट को पूरी तरह से एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया था।
मौके पर मौजूद ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP Rural) पंकज गैरोला ने बताया, "प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने बैरिकेड्स को नुकसान पहुँचाया और जबरन आगे बढ़ गए। हम कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में रखने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।" स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय एसडीएम (SDM) और तहसीलदार सहित आला अधिकारियों ने निहंगों के साथ बातचीत भी की, लेकिन यह वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही।
पारंपरिक हथियारों के साथ की धक्का-मुक्की, बैरिकेड्स तोड़े
बॉर्डर पर रोके जाने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया। पारंपरिक नीली पोशाक में सजे, तलवारों, लाठियों और धारदार हथियारों से लैस दर्जनों निहंगों ने शारीरिक बल का प्रयोग करते हुए भारी लोहे के बैरिकेड्स को हटा दिया और आगे की तरफ मार्च कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक कर्णप्रयाग मामले में गिरफ्तार किए गए उनके चार साथियों को रिहाई नहीं मिल जाती, वे पंजाब वापस नहीं लौटेंगे।
शांतिपूर्ण यात्रा और समझौते का दावा
दूसरी ओर, निहंग समूह के एक प्रतिनिधि ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम केवल प्रार्थना करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से अपनी तीर्थयात्रा पूरी करना चाहते हैं। हम स्थानीय लोगों के साथ किसी भी टकराव के बजाय समझौते के जरिए मामले को सुलझाना चाहते हैं।"
उनका दावा है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि हिरासत में लिए गए लोगों की जमानत की प्रक्रिया कुछ दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। हालांकि, निहंगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे तब तक उत्तराखंड में ही डटे रहेंगे जब तक कि उनके साथी रिहा होकर उनके साथ पंजाब वापस जाने के लिए उपलब्ध नहीं हो जाते।
क्या था कर्णप्रयाग का पूरा विवाद?
गौरतलब है कि बीते दिनों कर्णप्रयाग में स्थानीय निवासियों और निहंग सिखों के एक अन्य समूह के बीच मामूली बात को लेकर विवाद शुरू हुआ था, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि निहंगों ने तलवारें लहराईं, जिससे कुछ स्थानीय लोग घायल हो गए, जबकि इस झड़प में एक निहंग सिख को भी चोटें आईं।
घटना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसी कार्रवाई को सिख समुदाय के एक धड़े ने "एकतरफा" बताते हुए नाराजगी जताई है, जिसके बाद से यह पूरा विवाद गहराया हुआ है।