ट्रेलर और ट्रक के बीच पिसी कार, धनबाद के एक ही परिवार के 6 लोगों की दर्दनाक मौत
हजारीबाग की दनुआ घाटी में मौत का तांडव,हादसे में 3 मासूमों ने भी गंवाई जान
हजारीबाग/धनबाद। झारखंड के हजारीबाग जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। चौपारण स्थित दनुआ घाटी शनिवार को एक बार फिर काल का ग्रास बन गई। यहाँ एक भीषण सड़क हादसे में धनबाद के एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौत हो गई, जिनमें तीन मासूम बच्चे भी शामिल हैं। हादसा इतना खौफनाक था कि कार दो भारी वाहनों के बीच दबकर मलबे का ढेर बन गई।
दो भारी वाहनों के बीच 'सैंडविच' बनी कार
जानकारी के अनुसार, धनबाद के मधुबन बुदौरा कॉलोनी निवासी और बीसीसीएल (BCCL) के लाइनमैन शिव कुमार भुइयां (45) अपने परिवार के साथ कार से गया (बिहार) के आमस में एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे।
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कैसे हुआ हादसा: दनुआ घाटी के जोड़राही पुल के पास अचानक कार आगे चल रहे एक ट्रेलर के पिछले हिस्से से टकरा गई।
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पीछे से आई मौत: कार सवार कुछ समझ पाते, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने कार को जोरदार टक्कर मार दी। दो भारी वाहनों के बीच दबने से कार के परखच्चे उड़ गए।
मृतकों की सूची:
शिव कुमार भुइयां (45 वर्ष)
रूबी देवी (पत्नी, 38 वर्ष)
सोनी (पुत्री, 12 वर्ष)
सुहानी (पुत्री, 9 वर्ष)
प्रेम (साले का पुत्र, 7 वर्ष)
शिव कुमार के ससुर।
मंजर देख कांप उठे लोग: गैस कटर से निकाले गए शव
हादसे का दृश्य इतना वीभत्स था कि मौके पर पहुंचे ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों की रूह कांप गई। अंधेरे और भारी वाहनों के दबाव के कारण मासूम बच्चों के शव टुकड़ों में मिले। सूचना मिलते ही चौपारण पुलिस और NHAI की बचाव टीम पहुंची। काफी मशक्कत के बाद गैस कटर की मदद से कार के लोहे को काटकर शवों को बाहर निकाला जा सका।
घर में इकलौता चिराग बचा रंजीत, कॉलोनी में पसरा सन्नाटा
शिव कुमार शनिवार दोपहर 12 बजे खुशी-खुशी परिवार के साथ निकले थे, लेकिन किसे पता था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी। परिवार में अब सिर्फ उनका बेटा रंजीत कुमार बचा है, जो किसी कारणवश घर पर ही रुक गया था। पड़ोसियों ने उसे अब तक पूरी सच्चाई नहीं बताई है, लेकिन पूरे बुदौरा कॉलोनी में इस खबर के बाद मातम पसरा हुआ है।
दनुआ घाटी: राहगीरों के लिए 'डेथ जोन'
गौरतलब है कि पिछले 4 दिनों में इस इलाके में यह पांचवीं बड़ी दुर्घटना है। प्रशासन द्वारा 'ब्लैक स्पॉट्स' चिन्हित किए जाने के बावजूद यहाँ हादसों पर लगाम नहीं लग पा रही है। तेज ढलान, खतरनाक मोड़ और भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार इस घाटी को 'मौत का पर्याय' बना चुकी है।