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ईंधन बचाने के लिए सरकार का 'मास्टर प्लान': मंत्रियों की यात्राओं पर लगाम, अफसरों को मेट्रो से चलने के निर्देश

पीएम मोदी की अपील के बाद एक्शन मोड में मंत्रालय; वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स के जरिए तेल की खपत कम करने की तैयारी

 

नई दिल्ली [भदैनी मिरर]: वैश्विक ऊर्जा संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से तेल बचाने की अपील के बाद, अब सरकार खुद उदाहरण पेश करने जा रही है। सरकार ने अपने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सख्त गाइडलाइंस तैयार की हैं, ताकि ईंधन की खपत में कटौती की जा सके और आयात बिल को कम किया जा सके।

मंत्रियों और अफसरों के लिए नई पाबंदियां

सरकार ने शीर्ष स्तर पर ईंधन बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:

  • यात्राओं पर रोक: मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को गैर-जरूरी घरेलू और विदेशी यात्राओं को तुरंत सीमित करने या टालने के लिए कहा गया है।

  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग: नए 'कर्तव्य भवन' कॉम्प्लेक्स में कार्यरत अधिकारियों को मेट्रो या अन्य सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

  • वर्चुअल कांफ्रेंस: सेमिनार और बैठकों को फिजिकल मोड के बजाय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है।

वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड मॉडल की वापसी

विभिन्न सरकारी विभाग अब 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) और हाइब्रिड वर्किंग मॉडल को दोबारा लागू करने की योजना बना रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य दफ्तर आने-जाने में होने वाले तेल के खर्च को बचाना है। सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र की कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को रिमोट वर्क के लिए प्रोत्साहित करें।

भव्य आयोजनों और शादियों पर भी हो सकता है विचार

सूत्रों के मुताबिक, सरकार सरकारी आयोजनों में होने वाले भव्य खर्च और कुकिंग गैस की खपत को कम करने की तैयारी में है। इतना ही नहीं, यदि हालात और गंभीर होते हैं, तो बड़े पैमाने पर होने वाले निजी आयोजनों और बड़ी शादियों के लिए भी मेहमानों या संसाधनों की सीमा तय करने पर विचार किया जा सकता है।

क्या देश में तेल का संकट है?

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को आश्वस्त किया है।

  • पर्याप्त भंडार: भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का कच्चा तेल और 45 दिनों का एलपीजी (LPG) रिजर्व मौजूद है।

  • प्रबंधन पर जोर: सरकार का कहना है कि यह आर्थिक संकट नहीं, बल्कि 'ईंधन प्रबंधन' का मामला है। वित्त मंत्रालय वैश्विक स्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि ऊर्जा संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

फिलहाल सरकार खुद पर नियम लागू कर जनता के लिए मिसाल कायम करना चाहती है। कार-पूलिंग और वाहनों के सीमित इस्तेमाल जैसे सुझावों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के दबाव के चलते तेल और गैस के दाम बढ़ने की संभावनाओं पर वित्त मंत्रालय नजर रख रहा है।