जहरीले कफ सिरप तस्करी कांड में प्रवर्तन निदेशालय की हो चुकी एंट्री, 200 करोड़ का हो चुका है कारोबार
अमित सिंह टाटा, भोला जायसवाल और आलोक सिंह की गिरफ्तारी के बाद फूट रहा सिंडिकेट का भांडा
दुबई में छिपे शुभम जायसवाल को भगोड़ा घोषित करने और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी
वाराणसी, भदैनी मिरर। जहरीले कफ सिरप तस्करी में करोड़ों के कारोबार को देखते हुए अब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी जांच शुरू कर दी है। यूपी, मध्य प्रदेश, बिहार के सफेदपोशों से इसके तार जुड़ने के बाद शुरू हुई आरम्भिक जांच में पता चला कि नशीले कफ सिरप का सिंडीकेट लगभग 2000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुका है। इस अवैध कारोबार के लिए फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इसमें कुछ बैंक अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध है।
सत्ताधारी सफेदपोशों के संरक्षण में पल रहे रहे इस सिंडीकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी भी हैरत में हैं। ईडी के अधिकारी सिंडीकेट की कड़ियां जोड रहे हैं। लेकिन इस कांड से जुड़े बाहुबली और सफेदपोश अपने बचाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
सूत्र बताते हैं कि ईडी के अधिकारी एसटीएफ, एसआईटी, जिलों की पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से प्राप्त जानकारियों को जुटा चुके हैं। इसमें कुछ ऐसे अधिकारी और सफेदपोश हैं जिन पर शिकंजा कस पाना आसान नही है। इनमें कुछ सफेदपोश ऐसे भी हैं जिनका पहले कई बार भ्रष्टाचार में नाम आया, लेकिन वह बच निकले। इस मामले में उन्हें अपने बच निकलने की उम्मीद है।
ईडी की जांच में आरोपितों की कई कम्पनियों, फर्मों और संपत्तियों की जानकारी मिली है। फर्मों के बैंक खातों में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। इस मामले में ईडी की लखनऊ और प्रयागराज की टीमें छानबीन कर रही हैं। उधर, पूर्वांचल के माफिया की संरक्षण में पल रहे आरोपितों और सोशल मीडिया के जरिए काफी जानकारियां मिल चुकी हैं। लेकिन माफिया को अब तक जांच के दायरे में नही लाया जा सका है। आरोपितों शुभम, अमित, उसके पिता भोला और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह के सत्ता से जुड़े नेताओं से गहरे सम्बंधों की बात जांच एजेंसियां जानती है। इस बात को बनारस और जौनपुर के अधिकतर लोगों को जानकारी है। अभी हाल ही मैं सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर अचानक बीमार हुए और मेदांता अस्पताल में भर्ती हुए थे। तब वहां उन्हें देखने कफ सिरप कांड का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल वहां गया था। उसकी यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।
ओपी राजभर का यूपी की सत्ता में क्या प्रभाव है यह किसी से छिपा नही है। मुख्यमंत्री के खिलाफ अपात्तिजनक टिप्पणियां करने के बावजूद भी वह कैबिनेट मंत्री बने हुए हैं। इस मामले में आलोक सिंह का भी नाम है, जो पूर्व ब्येरोक्रेट का करीबी है। राजधानी लखनऊ में रियल एस्टेट का कारोबार करता है। वह भी बाहुबली के प्रभाव का इस्तेमाल कर सुल्तानपुर रोड पर जमीनों की खरीद-फरोख्त करता है। बताया जाता है कि विशाल सिंह अमित सिंह टाटा और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह को दुबई ले गया था। इसलिए जहरीले कफ सिरप कांड के आरोपितों के दुबई कनेक्शन की जानकारियां भी एसटीएफ के पास हैं। एसटीएफ विशाल सिंह तक पहुंचने की कोशिश में हैं। लेकिन सफेदपोशों का दबाव कार्रवाई में बाधक बना हुआ है। इधर, शुभम जायसवाल को भगोड़ा घोषित करने और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट तैयारी कर चुकी है।