मानसून में झमाझम बारिश के बीच मंडराया एल-नीनो का खतरा
अगस्त की बारिश से दिल्ली समेत कई राज्यों में राहत और खरीफ बुवाई में सुधार, लेकिन पूर्वी भारत और कृषि पर एल-नीनो व Positive IOD की दोहरी मार का जोखिम
भदैनी मिरर, नई दिल्ली: पिछले कुछ महीनों की शुष्कता के बाद अगस्त 2026 की शुरुआत ने देश के कई हिस्सों में भारी राहत दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित 12 से अधिक राज्यों में हुई मूसलाधार बारिश ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दिल्ली में अगस्त के पहले आठ दिनों के भीतर ही पूरे महीने की औसत बारिश का आंकड़ा पार हो गया, जो 2011 के बाद से सबसे ज्यादा बारिश वाला पहला सप्ताह दर्ज किया गया है।
हालांकि, इस तेज बारिश के कारण शहरी क्षेत्रों में जलभराव, यातायात व्यवस्था का प्रभावित होना और सुरक्षा अलर्ट जारी करने जैसी स्थितियां उत्पन्न हुईं, लेकिन इससे कुल मानसूनी घाटे में बड़ी कमी आई है।
कृषि क्षेत्र को संजीवनी, लेकिन धान और तिलहन अब भी पीछे
अगस्त की बारिश से खरीफ की फसलों की बुवाई में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:
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कुल बुवाई घाटा: 24 जुलाई के 38.82 लाख हेक्टेयर से घटकर 7 अगस्त तक केवल 17.96 लाख हेक्टेयर रह गया है।
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दलहन (Pulses): बुवाई की कमी 6.90 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.95 लाख हेक्टेयर पर आ गई है।
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धान और तिलहन की चुनौती: धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में अब भी 15.90 लाख हेक्टेयर कम है, जबकि तिलहन की कमी बढ़कर 5.19 लाख हेक्टेयर हो गई है।
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure System) से मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत में आगामी दिनों में और बारिश होगी, जिससे इस अंतर को पाटने में मदद मिल सकती है।
पूर्वी और दक्षिण भारत में चिंताजनक स्थिति
जहाँ एक ओर मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून मेहरबान है, वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। इस पूरे क्षेत्र में वर्षा सामान्य से लगभग 25.5 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जिसका सीधा प्रभाव शुरुआती चरण में अधिक पानी की खपत वाली धान की खेती पर पड़ा है।
एल-नीनो (El Niño) और पॉजिटिव IOD का डबल अटैक
भले ही तात्कालिक बारिश राहत दे रही हो, लेकिन विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के दीर्घकालिक जलवायु पूर्वानुमान भारत के लिए गंभीर संकेत दे रहे हैं।
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एल-नीनो का प्रभाव: अगस्त से अक्टूबर की अवधि के दौरान एल-नीनो के सक्रिय होने से भारतीय उपमहाद्वीप में सूखे, औसत से कम बारिश और असामान्य उच्च तापमान का खतरा बढ़ जाता है।
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पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD): हिंद महासागर में बन रहा यह सिस्टम पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से की तुलना में अधिक गर्म कर रहा है। एल-नीनो और पॉजिटिव IOD का यह मिला-जुला समुद्री पैटर्न दक्षिण एशिया में मानसून के चक्र को बिगाड़ सकता है।
'घर के अंदर पहुंच गया है एल-नीनो' — संयुक्त राष्ट्र (UN)
जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है:
"एल-नीनो सिर्फ हमारे दरवाजे पर ही दस्तक नहीं दे रहा, बल्कि वह घर के अंदर दाखिल होकर तापमान बढ़ा रहा है। यह तो महज शुरुआत है। एल-नीनो का मजबूत होना उस धरती पर आग में घी डालने जैसा है जो पहले से ही रिकॉर्ड गर्मी, जंगलों की आग और गर्म होते महासागरों से जूझ रही है।"