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बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले ED का बड़ा एक्शन: कोलकाता समेत 9 ठिकानों पर छापेमारी, राशन घोटाले में एक्सपोर्टर्स पर शिकंजा

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में हेराफेरी का मामला: बर्दवान और हाबरा में भी दबिश, पूर्व सांसद नुसरत जहां से भी जुड़े हैं जांच के तार

 

कोलकाता डेस्क: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हड़कंप मचा दिया है। शनिवार सुबह से ही जांच एजेंसी की टीमों ने कोलकाता, बर्दवान और हाबरा के नौ अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। यह पूरी कार्रवाई राशन वितरण प्रणाली (PDS) में हुए कथित मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच का हिस्सा है।

सप्लायर्स और एक्सपोर्टर्स के ठिकानों पर दबिश

ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, जिन ठिकानों पर छापेमारी चल रही है, वे राशन सप्लाई और निर्यात से जुड़े कारोबारियों के हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि गरीबों के हक का राशन अवैध तरीके से खुले बाजार और सीमा पार निर्यात किया गया है। वर्तमान में ईडी की टीमें इन ठिकानों से वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही हैं।

कैसे हुआ राशन घोटाला?

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मिलकर सरकारी गेहूं और चावल की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की।

  • मोडस ऑपरेंडी: सप्लायर्स और बिचौलियों ने एफसीआई (FCI) और राज्य सरकार के बोरों को बदलकर गेहूं की पहचान छिपाई।

  • अवैध बिक्री: सरकारी अनाज को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा गया या अवैध तरीके से विदेश निर्यात कर दिया गया।

  • लॉकडाउन कनेक्शन: इस घोटाले की जड़ें कोविड-19 लॉकडाउन से जुड़ी हैं, जब बशीरहाट सीमा पर बांग्लादेश की ओर तस्करी किए जा रहे राशन लदे ट्रकों को जब्त किया गया था।

नुसरत जहां से पूछताछ और रडार पर दिग्गज

इस मामले की आंच पूर्व टीएमसी सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां तक भी पहुंच चुकी है। हाल ही में उन्हें ईडी ने तलब किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि तस्करी के इस खेल में किन-किन सफेदपोशों और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त था। इससे पहले नुसरत जहां से फ्लैट धोखाधड़ी के मामले में भी लंबी पूछताछ हो चुकी है।

चुनावी माहौल में बढ़ी तपिश

दूसरे चरण के चुनाव से ऐन पहले इस कार्रवाई ने बंगाल की राजनीतिक हवा को और गरमा दिया है। जहां विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार बता रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करार दे रहा है। फिलहाल, नौ ठिकानों पर ईडी की तलाशी जारी है और आने वाले समय में कुछ बड़ी गिरफ्तारियों की भी संभावना जताई जा रही है।