ECI Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अवमानना याचिका की तैयारी, अटॉर्नी जनरल से मांगी गई सहमति
चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर सार्वजनिक निर्देश जारी करने का गंभीर आरोप; सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने अटॉर्नी जनरल को लिखा पत्र, भदैनी मिरर की विशेष रिपोर्ट।
नई दिल्ली / डिजिटल डेस्क (भदैनी मिरर): भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर बहु-सदस्यीय सहमति और आपसी तालमेल के कथित रूप से पूरी तरह टूटने की मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला अब कानूनी विवाद में बदल गया है। सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्रवाई (Criminal Contempt Action) शुरू करने के लिए भारत के अटॉर्नी जनरल से वैधानिक सहमति मांगी है।
यह कदम निर्वाचन आयोग के भीतर अन्य चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर फैसले लिए जाने के आरोपों के बाद उठाया गया है।
"संविधान के अनुच्छेद 141 का उल्लंघन"
अटॉर्नी जनरल को सौंपे गए अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अन्य साथी चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर 'पूर्ण आयोग' (Full Commission) के बैनर तले सार्वजनिक निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
अधिवक्ता ने अपने बयान में कहा:
"अन्य साथी चुनाव आयुक्तों को बाईपास करके 'पूर्ण आयोग' के नाम पर गुप्त रूप से सार्वजनिक निर्देश जारी करना, संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून की स्पष्ट और जानबूझकर की गई अवमानना है।"
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयोग के भीतर बहु-सदस्यीय संस्था के रूप में निर्णय लेने की प्रक्रिया में मतभेद और सहमति का अभाव देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई महत्वपूर्ण फैसलों और निर्देशों को जारी करते समय साथी चुनाव आयुक्तों की सहमति प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है।
इसी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने अटॉर्नी जनरल से आपराधिक अवमानना अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए आधिकारिक सहमति की मांग की है।
आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
संविधान के तहत निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में काम करता है, जहां सभी प्रमुख फैसले सहमति या बहुमत से लिए जाने का प्रावधान है। ऐसे में सर्वोच्च अदालत के वकील द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अवमानना की सहमति मांगने के इस कदम ने देश की शीर्ष संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में अटॉर्नी जनरल क्या रुख अपनाते हैं।