Dussehra Ravan Dahan 2026: कहीं 221 फीट का रावण तो कहीं 'कॉकरोच' और 'नकली दवाओं' के पुतले का दहन
दिल्ली में भारत का सबसे ऊंचा 221 फीट का रावण, पीतमपुरा में गंदगी का प्रतीक बना 30 फीट का कॉकरोच
नेशनल व फेस्टिवल डेस्क (भदैनी मिरर):देश भर में आज विजयादशमी (दशहरा 2026) का पर्व अपार उत्साह, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। इस बार दशहरे के अवसर पर केवल पारंपरिक रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले ही नहीं जलाए जा रहे हैं, बल्कि आधुनिक समाज की ज्वलंत बुराइयों जैसे— नकली दवाओं की बिक्री, एमआरपी (MRP) की लूट, गंदगी, आतंकवाद और राष्ट्र-विरोधी मानसिकता को 'आज का रावण' बनाकर उनका प्रतीकात्मक दहन किया जा रहा है।
दिल्ली में आकर्षण का केंद्र: 221 फीट का रावण और घूमती तलवार
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भारत का सबसे ऊंचा रावण (द्वारका): दिल्ली के द्वारका स्थित श्री रामलीला सोसायटी द्वारा 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है, जिसे भारत में रावण का सबसे ऊंचा पुतला बताया जा रहा है। इसे बनाने में लगभग 38 से 40 लाख रुपये की लागत आई है। इसके साथ 90-90 फीट के कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी लगाए गए हैं।
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लव कुश रामलीला (लाल किला): यहां 110 फीट ऊंचा विशेष रावण का पुतला बनाया गया है, जिसके हाथ में मौजूद तलवार यांत्रिक रूप से घूमेगी और उसकी आंखें जलती हुई नजर आएंगी।
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नकली दवाओं व लूट का रावण (इंद्रप्रस्थ): आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए ग्राउंड में 'आज का रावण' बनाया गया है, जो नकली दवाओं और कंज्यूमर लूट का प्रतीक है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं।
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सफाई जागरूकता हेतु 'कॉकरोच' का पुतला (पीतमपुरा): पीतमपुरा में रावण के साथ 30 फीट का 'कॉकरोच' का पुतला भी बनाया गया है, जो समाज में गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विशेष पुतले
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लखनऊ: लखनऊ के रामलीला मैदान में 75 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है, जो 'राष्ट्र-विरोधी', 'सनातन-विरोधी' और 'दिमागी नक्सलवाद' का प्रतीक है।
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देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में 181 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रिमोट का बटन दबाकर दहन करेंगे।
प्रमुख शहरों में रावण दहन का समय (Ravan Dahan Timings 2026)
| शहर (City) | रावण दहन का समय (Timing) |
| वाराणसी (Varanasi) | शाम 5:26 बजे के बाद |
| लखनऊ (Lucknow) | शाम 5:35 बजे के बाद |
| कानपुर (Kanpur) | शाम 5:38 बजे के बाद |
| नोएडा / गाजियाबाद | शाम 5:47 बजे के बाद |
| नई दिल्ली (New Delhi) | शाम 5:48 बजे के बाद |
| जयपुर (Jaipur) | शाम 5:54 बजे के बाद |
| भोपाल (Bhopal) | शाम 5:51 बजे के बाद |
| पटना (Patna) | शाम 5:18 बजे के बाद |
| मुंबई (Mumbai) | शाम 6:12 बजे के बाद |
| कोलकाता (Kolkata) | शाम 5:07 बजे के बाद |
दशहरा का पौराणिक एवं सामाजिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने विजयादशमी के ही दिन लंकापति रावण का वध कर धर्म और सत्य की स्थापना की थी। उसी विजय की स्मृति में हर वर्ष रावण दहन किया जाता है। यह पर्व हर युग में समाज को यह संदेश देता है कि अधर्म और असत्य का दायरा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में जीत सदैव सत्य, धर्म और अच्छाई की ही होती है।