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DRDO का महा-धमाका! 24 घंटे में 3 सफल मिसाइल टेस्ट; दुश्मन के मंसूबों को राख करने के लिए तैयार भारत का नया सुरक्षा कवच

दुनिया के 'एलीट क्लब' में शामिल हुआ भारत, 2000 से 5000 किमी दूर से आने वाली दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही कर देगा नेस्तनाबूत

 

नई दिल्ली: भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा क्षेत्र में एक बार फिर इतिहास रचते हुए बहुत बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा महाशक्तियों के 'एलीट क्लब' में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से देश को बचाने की अचूक और अचूक तकनीक है। DRDO ने महज 24 घंटे के भीतर लगातार तीन मिसाइलों के सफल उड़ान परीक्षण (Flight Tests) कर दुनिया को भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का अहसास करा दिया है। इन परीक्षणों में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के साथ-साथ अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइल टेक्नोलॉजी भी शामिल है।

24 घंटे के भीतर 3 बड़े महा-परीक्षण

DRDO से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन सफल परीक्षणों ने लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए भारत के बहुस्तरीय (Multi-layered) डिफेंस आर्किटेक्चर की ताकत को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। लाइव टेस्ट के दौरान मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने अपने तय किए गए लक्ष्यों को बेहद सटीकता से इंटरसेप्ट किया और उन्हें हवा में ही मार गिराया। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद भविष्य के किसी भी उन्नत और खतरनाक मिसाइल हमले से निपटने के लिए भारत की सीमाएं अब पूरी तरह अभेद्य हो चुकी हैं।

वायुमंडल के अंदर और बाहर... दुश्मन का बचना नामुमकिन!

शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि DRDO ने दो बेहद शक्तिशाली इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया है।

  • ये इंटरसेप्टर 2,000 किमी से लेकर 5,000 किमी के बीच मार करने वाली दुश्मन की इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBMs) को बेअसर करने में सक्षम हैं।

  • यह तकनीक 'एक्सो-एटमॉस्फेरिक' (वायुमंडल के बाहर) और 'एंडो-एटमॉस्फेरिक' (वायुमंडल के भीतर) दोनों ही स्तरों पर काम करती है, यानी दुश्मन की मिसाइल चाहे आसमान में हो या अंतरिक्ष की दहलीज पर, उसका बचना नामुमकिन है।

  • सुरक्षा कारणों से केंद्र सरकार ने फिलहाल इन इंटरसेप्टर्स के नाम उजागर नहीं किए हैं। विकास से जुड़े परीक्षण पूरे होने के बाद अब इन्हें जल्द ही सेना के पास 'यूजर ट्रायल्स' के लिए भेजा जाएगा।

पाकिस्तान और चीन की चालाकियों का करारा जवाब

रक्षा मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) को इतनी उच्च प्राथमिकता इसलिए दी है, क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान लगातार चीन की मदद से मल्टीपल वॉरहेड वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है। इसमें पाकिस्तान की फतेह-I (Fateh-I), फतेह-II (Fateh-II) और चीनी मूल की P282 मिसाइलें शामिल हैं। भारत का यह नया अचूक सुरक्षा चक्र पाकिस्तान और चीन की इसी जुगलबंदी का मुंहतोड़ जवाब है।

समुद्र में भी बढ़ी नौसेना की हनक

इस महा-सफलता की कड़ी में DRDO ने अपनी नई नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस टेस्ट ने साबित कर दिया है कि यह मिसाइल मध्यम दूरी पर समंदर के भीतर दुश्मन के युद्धपोतों को पलक झपकते ही तबाह कर सकती है। इससे भारतीय नौसेना की समुद्री हमले की ताकत में कई गुना इजाफा हुआ है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

इस ऐतिहासिक मिशन की बारीकी से निगरानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने की। वहीं, देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों की इस अद्भुत कामयाबी पर खुशी जताते हुए DRDO को बधाई दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि:

"यह उपलब्धि हवाई और समुद्री खतरों का मुकाबला करने में हमारी रक्षा तैयारियों को एक नई और अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी। देश को अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है।"